September 30, 2026 9:31 pm

बिना मस्टररोल के CAMPA कार्य! शंकरगढ़ वन परिक्षेत्र में मजदूरी भुगतान पर उठे गंभीर सवाल

 अब्दुल सलाम क़ादरी-एडिटर इन चीफ

  • RTI के जवाब में रेंजर ने लिखा—मजदूरों का मस्टररोल भरा ही नहीं गया; दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने का दिया हवाला, वर्षों के भुगतान की जांच की मांग

शंकरगढ़/बलरामपुर। रायपुर
वन विभाग के शंकरगढ़ वन परिक्षेत्र में CAMPA मद से कराए जा रहे कार्यों और मजदूरी भुगतान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में वन परिक्षेत्राधिकारी शंकरगढ़ की ओर से दिए गए लिखित पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि CAMPA मद के अंतर्गत मजदूरों का मस्टररोल नहीं भरा गया है। यही जवाब अब विभागीय कार्यप्रणाली और मजदूरी भुगतान की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रहा है।

दरअसल, पत्रकार एवं RTI कार्यकर्ता अब्दुल सलाम कादरी द्वारा 17 सितंबर 2026 को RTI आवेदन के माध्यम से 1 जनवरी 2025 से 17 सितंबर 2026 तक CAMPA मद से कराए गए कार्यों की जानकारी मांगी गई थी। इसमें कार्यों की सूची, कार्यादेश, मजदूरों का मस्टररोल, प्राक्कलन, एमबी, उपयोगिता प्रमाण-पत्र, भुगतान संबंधी अभिलेख, वाउचर, बिल सहित अन्य संबंधित दस्तावेजों की सत्यापित प्रतियां मांगी गई थीं।

RTI के जवाब में विभाग ने क्या कहा?

17 सितंबर 2026 को जारी पत्र क्रमांक 1085 में वन परिक्षेत्राधिकारी, शंकरगढ़ ने जवाब देते हुए लिखा कि मांगी गई जानकारी विस्तृत स्वरूप की है और एक से अधिक विषयों पर आधारित है। पत्र में यह भी कहा गया कि मांगे गए स्वरूप में दस्तावेज कार्यालय में उपलब्ध नहीं हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जवाब में विभाग की ओर से स्पष्ट रूप से लिखा गया है—

“कैम्पा मद अंतर्गत मजदूरों का मस्टररोल नहीं भरा गया है।”

यही एक पंक्ति अब पूरे मामले का सबसे अहम बिंदु बन गई है। क्योंकि यदि किसी कार्य में मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति और मजदूरी भुगतान का मस्टररोल ही तैयार नहीं किया गया, तो किस मजदूर ने कितने दिन काम किया, कितनी मजदूरी बनी और किस आधार पर भुगतान किया गया—इन सवालों का सत्यापन किस रिकॉर्ड से होगा?

फर्जी मजदूरी भुगतान का आरोप, जांच से सामने आएगा सच

मामले में आरोप है कि स्थानीय मजदूरों के स्थान पर दूसरे क्षेत्रों से मजदूर लाकर कार्य कराया जाता है और मजदूरी भुगतान की प्रक्रिया में ठेकेदार से जुड़े लोगों की भूमिका रहती है। आरोप यह भी है कि मजदूरों के नाम पर राशि निकालकर उसे वापस लेने का कथित खेल किया जाता है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इनकी वास्तविकता का पता निष्पक्ष विभागीय जांच, भुगतान अभिलेख, बैंक खातों, माप पुस्तिका, कार्यस्थल के रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के बयान से ही चल सकता है।

लेकिन RTI के जवाब में मस्टररोल नहीं भरे जाने की विभागीय स्वीकारोक्ति ने इन आरोपों की जांच की जरूरत को जरूर गंभीर बना दिया है।

चार-पांच साल के रिकॉर्ड की जांच हुई तो सामने आएगी पूरी तस्वीर

शंकरगढ़ वन परिक्षेत्र में यदि केवल वर्ष 2025-26 ही नहीं, बल्कि पिछले चार-पांच वर्षों में CAMPA सहित अन्य मदों से कराए गए कार्यों के रिकॉर्ड की जांच की जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

विशेष रूप से इन बिंदुओं की जांच जरूरी मानी जा सकती है—

  • CAMPA मद से स्वीकृत सभी कार्य और उनकी लागत।
  • प्रत्येक कार्य में मजदूरों की संख्या और भुगतान।
  • मस्टररोल तैयार किया गया या नहीं।
  • एमबी और मस्टररोल में दर्ज आंकड़ों का मिलान।
  • मजदूरों के बैंक खातों में किए गए भुगतान।
  • एक ही बैंक खाते/मोबाइल नंबर/परिवार से जुड़े संदिग्ध भुगतान।
  • कार्यस्थल पर वास्तव में काम करने वाले मजदूरों और भुगतान सूची का मिलान।
  • सामग्री एवं मजदूरी के भुगतान से संबंधित बिल-वाउचर।
  • संबंधित ठेकेदार/एजेंसी की भूमिका।
  • कार्यों की जियो-टैगिंग/फोटो एवं भौतिक सत्यापन।

पहली अपील के बाद राज्य सूचना आयोग फिर जरूरत पड़ी तो हाईकोर्ट तक जाने की तैयारी

RTI के जवाब से असंतुष्ट होकर आवेदक अब्दुल सलाम क़ादरी की ओर से प्रथम अपील दायर की जा चुकी है। यदि अपील में भी संतोषजनक जानकारी नहीं मिलती है तो मामला आगे राज्य सूचना आयोग तक ले जाने की बात कही गई है। आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय में भी याचिका दायर करने की तैयारी बताई गई है।

DFO की प्रतिक्रिया का इंतजार

मामले को लेकर बलरामपुर DFO की प्रतिक्रिया खबर लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सकी है। विभाग का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब विभागीय जवाब में स्वयं यह लिखा गया है कि CAMPA मद के अंतर्गत मजदूरों का मस्टररोल नहीं भरा गया, तो इन कार्यों में हुए मजदूरी भुगतान का आधार क्या रहा और सरकारी राशि के भुगतान की सत्यता का परीक्षण किस दस्तावेज से किया जाएगा?

शंकरगढ़ वन परिक्षेत्र का यह मामला अब केवल एक RTI के जवाब तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि CAMPA मद के कार्यों में रिकॉर्ड-रखरखाव, मजदूरी भुगतान और वित्तीय पारदर्शिता की व्यापक जांच की मांग खड़ी करता है। इसी कड़ी में अगली खबर जल्द………….

BBC LIVE
Author: BBC LIVE

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