September 13, 2026 10:52 pm

Gwalior-Jhansi Bypass होगा सुरक्षित, 109 करोड़ की लागत से बनेंगे 3 अंडरपास और फ्लाईओवर

ग्वालियर.

एनएच-44 के ग्वालियर-झांसी बायपास रूट पर सिकरौदा के बाद अब तीन पॉइंट पर और फ्लाई ओवर एवं अंडरपास बनेंगे। नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के इस प्लान को स्वीकृति मिल गई है और अब कंस्ट्रक्शन कंपनियों के साथ फाइनल एग्रीमेंट हो गए हैं।

बताया जा रहा है कि बारिश के बाद बिलौआ, कल्याणी और अर्रू तिराहे पर फ्लाई ओवर व अंडरपास का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। इन तीनों स्थानों पर होने वाले कामों पर करीब 109 करोड़ 43 लाख रुपये खर्च होंगे। सिकरौदा, बिलौआ, कल्याणी व अर्रू तिराहे पर लगातार होने वाले एक्सीडेंट को देखते हुए यह निर्णय जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में लिया गया था। जिसमें समिति अध्यक्ष व सांसद भारत सिंह कुशवाह ने एनएचएआई से डीपीआर तैयार कराई थी और फिर केंद्र सरकार से राशि स्वीकृत कराई। अधिकारियों का कहना है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद तिराहे पर होने वाले हादसों में कमी आएगी। यह निर्माण कार्य अगले महीने अक्तूबर में शुरू हो जाएगा। इसके तहत अलग-अलग पॉइंट्स की समस्या का समाधान हो सकेगा।

हादसे के बड़े कारण…
सिकरौदा और अर्रू तिराहा
ग्रामीणों और स्थानीय वाहनों के आवागमन के लिए अवैध कट बने हुए हैं, जहां से अचानक वाहन मुख्य हाइवे पर आ जाते हैं।
क्रेशर व हैवी माइनिंग ट्रैफिक
बिलौआ क्रेशर मंडी क्षेत्र से यहां मिट्टी व पत्थरों से लदे डंपर, ट्रक व ओवरलोडेड वाहन अनियंत्रित गति में हाइवे पर आते हैं।
ओवरटेकिंग
एनएच-44 पर वाहन 100-120 किमी घंटा से अधिक की रफ्तार में चलते हैं। तिराहे या मोड़ पर अचानक ब्रेक लगाने का समय नहीं मिलता।
स्ट्रीट लाइट और संकेतक
कल्याणी व अर्रू तिराहे के पास रात में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था और सर्विस रोड/साइन बोर्ड न होने से दूर से आ रहे वाहनों को मोड़ का अंदाजा नहीं लगता।
रॉन्ग-साइड ड्राइविंग
स्थानीय ग्रामीण और क्रेशर क्षेत्र के वाहन चालक समय और दूरी बचाने के चक्कर में हाइवे की गलत दिशा में वाहन चलाते हैं, जो कई बार आमने-सामने की भिड़ंत का कारण बनता है।

लोगों को मिलेगी राहत
इस बायपास पर सबसे बड़ा ब्लैक स्पॉट सिकरौदा तिराहे पर है। जहां आए दिन बड़े हादसे होते हैं और अब तक सैकड़ों लोगों की मौत इन हादसों में हो चुकी है। अब यहां एक फ्लाई ओवर बनने से सड़क हादसों में कमी आएगी।

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Author: Editor

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