इंदौर
इंदौर में पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल (ड्राइवर) फिरोज खान से जुड़ी आय से अधिक संपत्ति की जांच में 51 अचल संपत्तियां मिली हैं। इनका अनुमानित बाजार मूल्य 68 करोड़ रुपए से अधिक है।
ऐसे में प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी आगे जांच कर सकता है। हालांकि, इसके लिए लोकायुक्त की विवेचना पूरी होने और कोर्ट में चालान पेश होने के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है, ताकि जांच एजेंसी को ठोस आधार मिल सके।
फिलहाल, लोकायुक्त संपत्तियों के दस्तावेज, बैंक खातों और निवेश के स्रोतों की पड़ताल कर रही है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि संपत्तियां भ्रष्टाचार से अर्जित रकम से खरीदी गईं या नहीं और क्या उस रकम को दूसरे लोगों या कंपनियों के नाम पर रखकर उसका स्रोत छिपाने की कोशिश की गई।
सरकारी सेवा में रहते आय से अधिक संपत्ति अर्जित की
फिरोज खान ने सरकारी सेवा में रहते हुए आय से अधिक राशि अर्जित की। इनमें जो संपत्ति बनाई उसकी बाजार में अनुमानित कीमत 68 करोड़ रुपए है। इसमें खासकर जमीन के बड़े सौदे किए और कंपनियां खड़ी की है।
कानूनी प्रावधानों के मुताबिक- यदि जांच में मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत आवश्यक शर्तें पूरी होती हैं, तो प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस मामले में जांच कर सकता है।
हालांकि, केवल संपत्तियों का बड़ा मूल्य सामने आना या आय से अधिक संपत्ति का आरोप लगना अपने आप में मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध साबित नहीं करता।
भ्रष्टाचार के अपराध से जुड़ सकता है PMLA
PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बनने के लिए यह स्थापित करना जरूरी है कि संबंधित संपत्ति किसी अनुसूचित अपराध से जुड़ी आपराधिक गतिविधि से अर्जित हुई है।
इसके बाद उस संपत्ति को छिपाने, अपने कब्जे में रखने, हासिल करने, इस्तेमाल करने या बेदाग संपत्ति के रूप में पेश करने जैसी गतिविधियों की जांच की जा सकती है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 में लोकसेवक द्वारा अवैध रूप से संपत्ति अर्जित करने यानी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने का अपराध शामिल है। यह अपराध PMLA की अनुसूची में शामिल है।
यदि लोकायुक्त की जांच में इस अपराध से जुड़ी आय और संपत्तियों के बीच संबंध स्थापित होता है तथा PMLA की अन्य कानूनी शर्तें पूरी होती हैं, तो मनी लॉन्ड्रिंग की जांच का आधार बन सकता है।
दूसरे लोगों के नाम संपत्ति होने की भी जांच
लोकायुक्त की जांच में अब तक 51 अचल संपत्तियों का पता चला है। जिनका अनुमानित बाजार मूल्य 68.01 करोड़ रुपए बताया गया है। इनमें परिवार के सदस्यों, परिचितों और संबंधित कंपनियों के नाम पर दर्ज संपत्तियां भी जांच के दायरे में हैं।
हाल में देवास जिले के राजोदा गांव में 1.15 हेक्टेयर कृषि भूमि दो महिलाओं रोशनी वर्मा और रानू कुशवाह के नाम पर दर्ज मिली। इसका पंजीयन मूल्य करीब 1.65 करोड़ रुपए और अनुमानित बाजार मूल्य 2.30 करोड़ रुपए बताया गया है।
ऐसी संपत्तियों के मामले में ईडी के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि खरीद के लिए रकम किसने दी, भुगतान किन बैंक खातों से हुआ, संबंधित लोगों की आय के स्रोत क्या हैं और संपत्ति पर वास्तविक नियंत्रण किसका है।
केवल किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर संपत्ति दर्ज होने से यह साबित नहीं होता कि वह बेनामी है या उसका संबंध अपराध से है। इसके लिए वित्तीय लेनदेन और दूसरे साक्ष्यों की जांच जरूरी होगी।
यदि इन पहलुओं पर पर्याप्त आधार मिलता है, तो ED कानून के मुताबिक कार्रवाई कर सकता है। वह अपराध से प्राप्त संपत्ति की पहचान, अस्थायी कुर्की और अभियोजन की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है। हालांकि, कुर्की या अभियोजन भी संबंधित वैधानिक प्रक्रिया और न्यायिक परीक्षण के अधीन होंगे।
यदि इन सवालों की जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो ED की कार्रवाई का कानूनी आधार बन सकता है। लेकिन संपत्तियों की कुल बाजार कीमत को सीधे अपराध से अर्जित रकम नहीं माना जा सकता है। खरीद लागत, वैध आय और अन्य वित्तीय स्रोतों का हिसाब भी देखना होगा।
फिलहाल लोकायुक्त की जांच पर नजर
फिलहाल लोकायुक्त पुलिस फिरोज खान से संबंधित संपत्तियों के दस्तावेज, बैंक खातों और आय के स्रोतों की जांच कर रही है।
51 अचल संपत्तियों के अनुमानित बाजार मूल्य और वैध आय के बीच अंतर जांच का महत्वपूर्ण पहलू है, लेकिन संपत्तियों की खरीद लागत, वैध आय, ऋण, अन्य वित्तीय स्रोत और वास्तविक स्वामित्व का सत्यापन भी आवश्यक होगा।
कानूनविदों के मुताबिक इस मामले में ED की जांच की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता।आगे की जांच में सामने आने वाले साक्ष्य और संबंधित एजेंसियों की कानूनी कार्रवाई ही यह स्पष्ट करेगी कि मामला PMLA के दायरे में किस हद तक आता है।






















