हार्दिक पंड्या जैसा ऑलराउंडर मिलना आसान नहीं है. टॉप ऑर्डर में बल्लेबाजी करने की क्षमता हो, चार ओवर गेंदबाजी का भरोसा हो और मुश्किल वक्त में मैच खत्म करने का दम भी हो, तो ऐसा खिलाड़ी टीम के लिए बेशकीमती बन जाता है. लेकिन अगर हार्दिक उपलब्ध नहीं हों, तो क्या टीम इंडिया के पास उनकी कमी से निपटने का रास्ता है? न्यूजीलैंड के खिलाफ क्राइस्टचर्च में तिलक वर्मा, नमन धीर और नीतीश कुमार रेड्डी ने इस सवाल का एक दिलचस्प जवाब दिया है.
एक खिलाड़ी नहीं, तीन युवाओं पर भरोसा
हार्दिक की जगह भरने के लिए किसी एक खिलाड़ी को तैयार करना आसान नहीं है. भारत को ऐसे खिलाड़ी की जरूरत है, जो बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में योगदान दे सके. यही वजह है कि टीम में दूसरे ऑलराउंडर विकल्पों की तलाश लगातार अहम बनी हुई है.
शिवम दुबे ने इस साल टी20 वर्ल्ड कप में अपनी भूमिका निभाई, जबकि नीतीश कुमार रेड्डी और नमन धीर जैसे खिलाड़ियों को भी मौके मिल रहे हैं. तिलक वर्मा की बल्लेबाजी में भी ऐसी खूबियां हैं, जो टीम को मध्यक्रम में मजबूती देती हैं. इन तीनों की भूमिका एक जैसी नहीं है, लेकिन उनकी अलग-अलग क्षमताएं टीम की जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकती हैं.
न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टी20 इंटरनेशनल में भारत के सामने 181 रनों का लक्ष्य था. एक समय टीम 70 रन पर पांच विकेट गंवा चुकी थी. मिचेल सैंटनर की फिरकी ने भारतीय बल्लेबाजी को मुश्किल में डाल दिया था. उन्होंने 4 ओवरों में 21 रन देकर चार विकेट झटके.
नमन धीर ने 17 गेंदों पर 31 रन बनाकर मुकाबले में भारत की वापसी की उम्मीद जगाई. उन्होंने सैंटनर के खिलाफ छक्का भी लगाया. धीर के आउट होने के बाद तिलक वर्मा और नीतीश कुमार रेड्डी ने जिम्मेदारी संभाली. तिलक ने नाबाद 51 रन बनाए, जबकि रेड्डी ने 13 गेंदों पर नाबाद 26 रन ठोके. दोनों ने सातवें विकेट के लिए 69 रनों की अटूट साझेदारी की.
भारत ने 19.5 ओवरों में छह विकेट पर 181 रन बनाकर चार विकेट से जीत हासिल की और पांच मैचों की सीरीज में 2-0 की बढ़त बना ली. यह साझेदारी भारतीय टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में सातवें विकेट के लिए भारत की सबसे बड़ी साझेदारी भी बनी.
तिलक वर्मा: मुश्किल वक्त में मैच खत्म करने का दम
तिलक ने 26 गेंदों पर नाबाद 51 रन बनाकर दिखाया कि वह दबाव में पारी को संभालने के साथ तेजी से रन भी बना सकते हैं. उनकी बल्लेबाजी की खासियत गेंदबाज की योजना को समझना और उसी के मुताबिक अपने शॉट्स का चयन करना है.
न्यूजीलैंड के गेंदबाज जैकब डफी ने ऑफ साइड की लंबी बाउंड्री को ध्यान में रखकर गेंदबाजी करने की कोशिश की, लेकिन तिलक ने अपनी पोजिशन बदलकर लेग साइड की छोटी बाउंड्री का फायदा उठाया. उन्होंने जल्दबाजी करने के बजाय सही मौके का इंतजार किया और अंत तक टिके रहे.
हार्दिक की तरह तिलक भी दबाव में बड़े शॉट खेलने में सक्षम हैं, लेकिन उनकी भूमिका मुख्य रूप से बल्लेबाजी की है. ऐसे में वह हार्दिक का सीधा विकल्प नहीं, बल्कि टीम के मध्यक्रम और फिनिशिंग क्षमता को मजबूत करने वाला खिलाड़ी हो सकते हैं.
नमन धीर: दबाव में बेखौफ बल्लेबाजी
नमन धीर ने इस मुकाबले में केवल 17 गेंदों पर 31 रन बनाए. उनकी पारी ने भारत को उस समय गति दी, जब लगातार विकेट गिरने से रन बनाने का दबाव बढ़ रहा था. उन्होंने स्पिनरों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया और यह दिखाया कि वह मुश्किल हालात में भी गेंदबाजों पर पलटवार कर सकते हैं.
धीर की उपयोगिता सिर्फ बल्लेबाजी तक सीमित नहीं है. वह गेंदबाजी भी कर सकते हैं, जिससे टीम को एक अतिरिक्त विकल्प मिलता है. हालांकि, हार्दिक जैसी नियमित चार ओवर की भूमिका निभाने के लिए उन्हें अपनी गेंदबाजी में भी निरंतर योगदान देना होगा.
नीतीश रेड्डी: बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी की जिम्मेदारी
नीतीश कुमार रेड्डी इस तिकड़ी में सबसे स्वाभाविक ऑलराउंडर विकल्पों में से एक हैं. वह तेज गेंदबाजी करते हैं और निचले मध्यक्रम में तेजी से रन बनाने की क्षमता रखते हैं. दूसरे टी20 में उन्होंने तिलक का अच्छा साथ दिया और 200 के स्ट्राइक रेट से नाबाद 26 रन बनाए.
डेथ ओवरों में बल्लेबाजी करते समय गेंदबाज की अगली चाल को पढ़ना और शांत रहना जरूरी होता है. रेड्डी ने मुश्किल समीकरण के बीच यही किया. उन्होंने तिलक के साथ मिलकर मैच को भारत की पकड़ में पहुंचाया और विजयी रन भी बनाया.
भारत उन्हें गेंदबाजी में भी अहम जिम्मेदारियां देकर तैयार कर रहा है. हालांकि, हार्दिक की जगह लेने के लिए सिर्फ बल्लेबाजी में कुछ तेज पारियां काफी नहीं होंगी. रेड्डी को नियमित रूप से गेंदबाजी में भी प्रभाव छोड़ना होगा.
हार्दिक की जगह का सवाल अभी खत्म नहीं हुआ
तिलक, धीर और रेड्डी के प्रदर्शन ने भारत को एक उपयोगी विकल्प जरूर दिखाया है. तीनों ने मिलकर 56 गेंदों पर 108 रन बनाए और मुश्किल मैच निकालकर अपनी क्षमता साबित की. लेकिन हार्दिक की खासियत बल्लेबाजी और गेंदबाजी में एक साथ बड़ा योगदान देना है. तीनों युवा अभी उस स्तर की संयुक्त जिम्मेदारी निभाने की प्रक्रिया में हैं.
भारत के लिए अच्छी खबर यह है कि उसके पास अलग-अलग खूबियों वाले युवा खिलाड़ी मौजूद हैं. अगर तिलक मध्यक्रम में रन बनाते रहें, धीर आक्रामक बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी में योगदान दें और रेड्डी दोनों विभागों में निरंतर प्रदर्शन करें, तो टीम को हार्दिक पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है.
फिलहाल इन्हें हार्दिक का आधिकारिक विकल्प कहना जल्दबाजी होगी. लेकिन क्राइस्टचर्च की जीत ने यह जरूर दिखाया है कि भारत एक खिलाड़ी पर पूरा बोझ डालने की बजाय अलग-अलग खिलाड़ियों की ताकत के सहारे टीम का संतुलन बनाए रखने की दिशा में आगे बढ़ सकता है.






















