October 20, 2026 12:58 am

फ्रांस में लूटपाट और हिंसा पर सख्त मैक्रों, गृह मंत्री से बोले- हालात पर काबू पाएं

पेरिस 

फ्रांस में विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा, आगजनी और लूटपाट ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. सुरक्षा व्यवस्था में चूक को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. इस बीच गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने इस्तीफे की पेशकश की, लेकिन राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इसे ठुकरा दिया. मैक्रों ने गृह मंत्री से लूटपाट और प्रदर्शन रोकने के लिए तुरंत कदम उठाने को कहा. साथ ही, हिंसा को रोकने में खुफिया तंत्र कहां चूका, इसकी जानकारी भी साफ-साफ देने का निर्देश दिया। 

दरअसल, फ्रांस में पिछले कई हफ्तों से छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं. शनिवार को भी बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे. प्रदर्शनकारियों की नाराजगी की वजह सरकारी सेवाओं में गिरावट, महंगाई और रोजमर्रा की बढ़ती लागत बताई जा रही है. लोगों का कहना है कि जरूरी सेवाएं ठीक से काम नहीं कर रहीं, जिससे आम लोगों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। 

हालांकि, कई जगह शांतिपूर्ण प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया. राजधानी पेरिस के अलावा मार्सेई और लियोन जैसे शहरों में तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं हुईं. शनिवार को एक टाउन हॉल में आग लगा दी गई. दुकानों को लूटा गया, जबकि कई इमारतों की दीवारों पर तोड़फोड़ के निशान दिखे. रविवार को भी पेरिस और मार्सेई में पुलिस को प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए उतरना पड़ा। 

60 हजार सुरक्षाकर्मी भी नहीं संभाल पाए हालात
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, लॉरेंट नुनेज ने बताया कि शनिवार को फ्रांस में 60 हजार पुलिसकर्मियों और अन्य सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था. इसके बावजूद कुछ शहरों में हिंसक भीड़ को काबू करना मुश्किल हो गया. ऐसे में सरकार कुछ इलाकों में कर्फ्यू लगाने की तैयारी भी कर रही है. प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने दंगे और लूटपाट पर काबू पाने के लिए सीमित इलाकों में कर्फ्यू लगाने की अपील की है। 

हिंसा के बाद नुनेज ने इस्तीफे की पेशकश की, लेकिन राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इसे ठुकरा दिया. उन्होंने गृह मंत्री को हालात सुधारने की जिम्मेदारी सौंपी. नुनेज से कहा गया कि वे लूटपाट रोकने के साथ सड़कों पर लगाए गए अवरोधों को हटाने के लिए जल्द नए कदम उठाएं। 

खुफिया तंत्र की चूक पर भी उठे सवाल
मैक्रों ने सिर्फ हिंसा रोकने का निर्देश नहीं दिया, बल्कि यह भी कहा कि सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक की जानकारी साफ-साफ सामने आनी चाहिए. सरकार को यह बताना होगा कि हिंसा की आशंका के बावजूद उसे रोकने के लिए पर्याप्त तैयारी क्यों नहीं की गई। 

इसके अलावा, न्याय मंत्री गेराल्ड डारमानिन ने भी सुरक्षा व्यवस्था में चूक की बात कही. उन्होंने कहा कि सरकार उन प्रदर्शनकारियों को कम आंक बैठी, जिन्हें उन्होंने अति-वामपंथी बताया. इस वजह से हिंसा से निपटने में राज्य की तैयारी कमजोर पड़ी। 

सरकार के सामने बजट की भी चुनौती
हिंसा ऐसे समय हुई है, जब फ्रांस की सरकार
को देश की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए बजट से जुड़ा अहम विधेयक पास कराना है. देश पर कर्ज का दबाव है. ऐसे में सरकार के भीतर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बढ़ती खींचतान उसकी मुश्किलें बढ़ा सकती है। 

फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव भी करीब छह महीने दूर हैं. हिंसा, महंगाई और सरकारी सेवाओं को लेकर लोगों की नाराजगी के बीच सरकार पर दबाव बढ़ रहा है. उधर, बाजार में भी इसका असर दिखा. फ्रांस की 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 4.86% पहुंच गई. इससे संकेत मिलता है कि देश की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति को लेकर निवेशक सतर्क हैं। 

Editor
Author: Editor

विज्ञापन
error: Content is protected !!