November 7, 2026 10:52 pm

छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य व्यवस्था का बंटाधार! सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच पिस रहे गरीब मरीज

अब्दुल सलाम क़ादरी-एडिटर इन चीफ

कोरिया, एमसीबी, जशपुर और बलरामपुर के दूरस्थ गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली पर उठे सवाल; कहीं डॉक्टरों की कमी, कहीं अस्पतालों में संसाधनों का अभाव तो कहीं झोलाछाप डॉक्टरों के भरोसे ग्रामीणों का इलाज। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के दावों की जमीनी समीक्षा जरूरी।

छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने और आम जनता को सुलभ चिकित्सा उपलब्ध कराने के सरकारी दावों के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है। क्या प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था वास्तव में गांवों तक पहुंच पा रही है? क्या दूरस्थ इलाकों में रहने वाले गरीब ग्रामीणों को समय पर डॉक्टर, दवाइयां और बेहतर इलाज मिल रहा है?

प्रदेश के कई दूरस्थ और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता आज भी गंभीर चुनौती बनी हुई है। विशेष रूप से कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी), जशपुर और बलरामपुर जैसे जिलों के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की वास्तविक स्थिति की जांच और समीक्षा की आवश्यकता है।

सरकारी अस्पतालों तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को कई किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। कई स्थानों पर डॉक्टरों की उपलब्धता, विशेषज्ञ चिकित्सा, जांच सुविधाओं, दवाइयों और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसी परिस्थितियों में गरीब परिवारों को निजी क्लीनिकों और कथित झोलाछाप डॉक्टरों का सहारा लेना पड़ता है।

प्रदेश के आंकड़े खोल रहे स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल

स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली केवल एक-दो जिलों तक सीमित नहीं है। जुलाई 2026 में प्रकाशित विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों पर आधारित एक रिपोर्ट के अनुसार:

  • प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों के लगभग 80 प्रतिशत पद रिक्त बताए गए।
  • स्टाफ नर्सों के 2,745 पद खाली बताए गए।
  • ग्रामीण चिकित्सा सहायकों के 817 स्वीकृत पदों में से 193 पद रिक्त बताए गए।
  • दंत चिकित्सकों के 180 स्वीकृत पदों में से 74 पद खाली बताए गए।

रिपोर्ट में जशपुर जिले में विशेषज्ञ डॉक्टरों के 193 स्वीकृत पदों में से 94 पद रिक्त होने की जानकारी भी दी गई है। सरगुजा जिले में 108 स्वीकृत विशेषज्ञ पदों में से 80 पद खाली बताए गए हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता कितनी बड़ी चुनौती है। CG Now

कोरिया और एमसीबी में भी मरीजों की परेशानी कम नहीं

कोरिया और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल उठते रहे हैं।

मनेन्द्रगढ़ के 220 बिस्तरों वाले जिला अस्पताल को लेकर फरवरी 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में डॉक्टरों की कमी, अनुबंधित चिकित्सकों की अनुपस्थिति और इमरजेंसी सेवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव का मुद्दा उठाया गया था। अस्पताल अधीक्षक और सीएमएचओ कार्यालय के दावों में भी विरोधाभास की बात सामने आई थी।

यह स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि दूरस्थ गांवों से जिला अस्पताल पहुंचना हर गरीब परिवार के लिए आसान नहीं है। मरीज की हालत बिगड़ने पर समय और दूरी दोनों बड़ी बाधा बन जाते हैं।

कोंडागांव से महासमुंद तक सामने आईं बदहाली की तस्वीरें

प्रदेश के दूसरे हिस्सों की खबरें भी स्वास्थ्य व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर करती हैं।

कोंडागांव: अक्टूबर 2026 में बयानार स्वास्थ्य केंद्र की एक रिपोर्ट में मेडिकल ऑफिसर, तीन स्टाफ नर्स, महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता, फार्मासिस्ट और ड्रेसर सहित सात पद खाली होने की जानकारी सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, वहां एक सफाईकर्मी मरीजों को इंजेक्शन लगाने, ड्रिप चढ़ाने और टांके लगाने जैसे काम कर रहा था। यह मामला स्वास्थ्य केंद्रों में प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

महासमुंद: जून 2026 में झलप प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एकमात्र डॉक्टर के अवकाश पर जाने के बाद वैकल्पिक डॉक्टर की व्यवस्था नहीं होने की खबर सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, आसपास के 35 से 40 गांवों के मरीज प्रभावित हुए और नर्सों को फोन पर दूसरे डॉक्टरों से सलाह लेकर काम करना पड़ रहा था।

ये घटनाएं अलग-अलग जिलों की हैं, लेकिन सवाल एक ही है—क्या सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त डॉक्टर और प्रशिक्षित स्टाफ उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी पूरी हो रही है?

CAG की ऑडिट रिपोर्ट में भी उठे थे स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने भी गंभीर परीक्षण किया है। CAG की रिपोर्ट संख्या 2 वर्ष 2024 में मार्च 2022 तक की अवधि के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य अधोसंरचना और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबंधन का परफॉर्मेंस ऑडिट शामिल है। इसमें डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल और सहायक कर्मचारियों की उपलब्धता की समीक्षा की गई है। Accountant General (Audit) Chhattisgarh, Raipur

वहीं PRS India की 2026-27 की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण बजट समीक्षा में वर्ष 2022-23 के ग्रामीण स्वास्थ्य आंकड़ों के आधार पर छत्तीसगढ़ में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की 88 प्रतिशत कमी का उल्लेख है। PRS Legislative Research

झोलाछाप डॉक्टरों के भरोसे ग्रामीणों की जिंदगी!

स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर नहीं मिलते, विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं होतीं और कई बार छोटी-मोटी बीमारियों के इलाज के लिए भी ग्रामीणों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे हालात में गांवों में बिना मान्यता या आवश्यक चिकित्सा योग्यता के इलाज करने वाले कथित झोलाछाप डॉक्टरों का प्रभाव बढ़ने की आशंका रहती है।

गरीब ग्रामीण मजबूरी में इनके पास पहुंचते हैं। लेकिन बिना उचित योग्यता और मानकों के इलाज कराना मरीजों की जिंदगी के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। स्वास्थ्य विभाग को ऐसे लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने के साथ-साथ गांवों में सरकारी चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के दावों की जमीनी समीक्षा कब?

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और चिकित्सा व्यवस्था को बेहतर बनाने की बात करते रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि सरकारी योजनाओं, घोषणाओं और दावों का वास्तविक लाभ दूरस्थ गांवों में रहने वाले गरीब परिवारों को कितना मिल रहा है?

अगर प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था बेहतर हो रही है तो फिर विशेषज्ञ डॉक्टरों के इतने पद खाली क्यों हैं? स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त स्टाफ क्यों नहीं है? ग्रामीणों को समय पर इलाज क्यों नहीं मिल पा रहा है?

सरकार और स्वास्थ्य विभाग से जनता के सवाल

  • प्रदेश के कितने सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों के पद रिक्त हैं?
  • कोरिया, एमसीबी, जशपुर और बलरामपुर में विशेषज्ञ डॉक्टरों की वास्तविक उपलब्धता कितनी है?
  • कितने प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 24 घंटे चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हैं?
  • ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय कथित झोलाछाप डॉक्टरों के विरुद्ध कितनी कार्रवाई हुई?
  • खाली पदों पर नियमित भर्ती और दूरस्थ क्षेत्रों में डॉक्टरों की तैनाती कब तक होगी?
  • क्या स्वास्थ्य विभाग प्रत्येक जिले के अस्पतालों का स्वतंत्र निरीक्षण कराएगा?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर छत्तीसगढ़ के गरीब ग्रामीणों को बेहतर इलाज के लिए कब तक इंतजार करना पड़ेगा?

स्वास्थ्य किसी भी सरकार की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक है। सड़क, भवन और घोषणाओं से विकास का दावा किया जा सकता है, लेकिन जब गांव का गरीब मरीज समय पर डॉक्टर और इलाज के अभाव में भटकता है, तब विकास के दावों की असली परीक्षा होती है।

अब जरूरत केवल घोषणाओं की नहीं, बल्कि अस्पतालों में डॉक्टर, दवाइयां, जांच सुविधाएं और जवाबदेह स्वास्थ्य प्रशासन सुनिश्चित करने की है।

छत्तीसगढ़ की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर विपक्ष के नेता प्रतिपक्ष की खामोशी क्यों? गरीब मरीजों के सवाल पर कांग्रेस नेतृत्व से जवाब मांग रही जनता!

प्रदेश में डॉक्टरों के 9,392 पद रिक्त होने की खबर, विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी और दूरस्थ गांवों में झोलाछाप डॉक्टरों के सहारे इलाज की मजबूरी। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के दावों पर सवाल तो उठ रहे हैं, लेकिन नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत की ओर से कोरिया, एमसीबी, जशपुर और बलरामपुर के ग्रामीण इलाकों की मौजूदा समस्याओं पर मुखर पहल क्यों नजर नहीं आ रही?

BBC LIVE
Author: BBC LIVE

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