October 31, 2026 12:31 am

उमर खालिद–शरजील की जमानत खारिज: यह न्याय नहीं, अन्याय की कहानी है, महबूबा की बेटी का बयान

नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं को सोमवार को खारिज कर दिया। यह फैसला 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में आया है, जहां दोनों पर UAPA के तहत साजिश रचने के आरोप लगे हैं। दंगों में 50 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और 700 से ज्यादा घायल हुए थे। SC के फैसले पर ढेर सारी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने इसे गर्भ में न्याय की मौत कहा है। एक्स पर उन्होंने पोस्ट करके कहा, ‘सुप्रीम कंटेम्प्ट ऑफ इंडिया, मिसकैरेज ऑफ जस्टिस।’

अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला गंभीर है और जमानत देने का आधार नहीं बनता। पूर्व जेएनयू छात्र नेता उमर खालिद और कार्यकर्ता शरजील इमाम लंबे समय से जेल में हैं। एससी के ताजा फैसले से मानवाधिकार संगठनों में हलचल मच गई है, जबकि सरकारी पक्ष ने इसे कानून की जीत बताया। फैसले की सुनवाई जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने की। दोनों आरोपियों ने दावा किया था कि लंबी हिरासत उनके अधिकारों का उल्लंघन है, लेकिन अदालत ने सबूतों के आधार पर याचिका अस्वीकार की। यह मामला CAA-NRC विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा है, जहां भाषणों को दंगे भड़काने का माध्यम माना गया।

दिल्ली में हुए दंगों का मुख्य साजिशकर्ता
उमर, शरजील और अन्य आरोपियों पर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों का मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप है। उनके खिलाफ यूएपीए और आईपीसी के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। क्षेत्र में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) के खिलाफ व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। दिल्ली उच्च न्यायालय ने दंगों की साजिश से जुड़े मामले में उमर सहित अन्य आरोपियों को जमानत देने से 2 सितंबर को इनकार कर दिया था। इसके बाद आरोपियों ने फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया था।

 

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Author: Editor

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