नई दिल्ली
ईरान ने खुद को होर्मुज स्ट्रेट का गेटकीपर घोषित कर दिया है. अब यहां से तेल लेकर होकर गुजरने वाले जहाजों को एक अच्छी खासी रकम ईरान की सरकार को चुकानी पड़ेगी. जंग के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंदकर रणनीतिक रूप से बेहद अहम इस समुद्री मार्ग पर अपने मालिकाना हक का ऐलान दुनिया के सामने कर दिया. यूं तो होर्मुज से नेविगेशन हमेशा ईरान की निगरानी में होती रही लेकिन ईरान ने कभी भी इस प्राकृतिक समुद्री मार्ग का इस्तेमाल पैसा कमाने के लिए नहीं किया था. पर अब ईरान ने औपचारिक रूप से इसकी घोषणा कर दी है.
लेकिन क्या समुद्री मार्ग जैसे प्रकृति द्वारा दी हुई नेमतों पर ईरान का टैक्स लगाना उचित है? इस बारे में ईरान का क्या तर्क है? इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय कानून क्या कहता है? क्या ईरान की तरह कोई और देश समुद्र में गुजरने वाले जहाजों से टोल टैक्स वसूलते हैं? इन प्रश्नों के जवाब एक एक कर हम आगे समझेंगे.
ईरान ने अपनी संसद में कानून बनाकर इसकी सूचना संयुक्त राष्ट्र की संस्था UNCLOS को दे दी है जो समुद्री नेविगेशन से जुड़े मामले को देखता है. अब यहां 'टोल बूथ' जैसा एक सिस्टम बन गया है.
अब जहाजों को ईरान के समुद्री क्षेत्र में प्रवेश करना होगा और ईरान के 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स-IRGC' द्वारा उनकी जांच की जाएगी. इसके बाद कुछ रकम चुकाकर ही ये जहाज आगे जा सकेंगे. अब तक कम से कम दो जहाजों ने IRGC को 2-2 मिलियन डॉलर रकम चाइनीज करेंसी में चुकाई है.
किस तर्क के आधार पर ईरान मांग रहा है टोल
जंग से पहले ईरान होर्मुज पार करने वाले जहाजों से कोई पैसा नहीं लेता था. लेकिन अब ईरान का कहना है कि होर्मुज उसके क्षेत्रीय जल और संप्रभु क्षेत्र में आता है. ईरान की संसद ने हाल ही में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज मैनेजमेंट प्लान पास किया है.
इसमें साफ लिखा है, "हम एक प्रस्ताव पर काम कर रहे हैं जिसमें ईरान की संप्रभुता, नियंत्रण और ओवरसाइट को कानूनी रूप से मान्यता मिले, और टोल वसूलकर देश के लिए कमाई का स्रोत भी बने."
ये बिल सुरक्षा, नेविगेशन, पर्यावरण संरक्षण और टोल सिस्टम पर आधारित है.
दरअसल ईरान कह रहा है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को वो सुरक्षा मुहैया कराता है. इसलिए इसलिए गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षा शुल्क या ट्रांजिट शुल्क देना चाहिए. ये कोई मनमानी नहीं, बल्कि सुरक्षित गुजरने के बदले चुकाया गया रकम है.
ईरान ने UN को पत्र लिखकर कहा कि ये अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के अंदर है.
UN का कानून क्या कहता है?
समुद्री परिवहन देखने वाली UN की संस्था UNCLOS (United Nations Convention on the Law of the Sea) के आर्टिकल 37-44 के तहत यहां ट्रांजिट पैसेज का अधिकार है. यानी हर जहाज को बिना रोक-टोक, बिना अनुमति और बिना कोई टोल/फीस के लगातार गुजरने का अधिकार है. इस अधिकार को तटीय देश, जैसे ईरान और ओमान बाधित नहीं कर सकते हैं.
ईरान ने UNCLOS साइन किया था लेकिन उसका कहना है कि हम इस नियम को पूरी तरह से नहीं मानते हैं. इसलिए वो कह रहा है कि वो ट्रांजिट पैसेज रिजीम से बंधा नहीं है. ईरान सिर्फ 'Innocent passage' का ही नियम मानता है.
ईरान ने 10 दिसंबर 1982 को UNCLOS पर साइन किया था. लेकिन कभी इसे आधिकारिक रूप से नहीं माना.
ट्रांजिट पैसेज और Innocent passage को समझें
ट्रांजिट पैसेज और 'Innocent Passage' UNCLOS के दो महत्वपूर्ण नियम हैं. ट्रांजिट पैसेज खास तौर पर अंतरराष्ट्रीय स्ट्रेट पर लागू होता है.
इसका मतलब जहाज़ और विमान बिना रुकावट लगातार और तेजी से गुजर सकते हैं. तटीय देश उन्हें रोक नहीं सकता और सामान्य स्थिति में टोल भी नहीं लगाया जा सकता है. यह अधिकार innocent passage से ज्यादा मजबूत होता है. होर्मुज इसी कैटेगरी में आता है.
जबकि इनोसेंट पैसेज के तहत कोई विदेशी जहाज किसी देश के क्षेत्रीय जल सीमा यानी कि 12 नॉटिकल मील तक शांतिपूर्ण तरीके से गुजर सकता है, लेकिन वह सैन्य गतिविधि नहीं करेगा, जासूसी नहीं करेगा, हथियार परीक्षण नहीं करेगा, देश की सुरक्षा को नुकसान नहीं पहुंचाएगा, यानी जहाज गुजर सकता है, लेकिन तटीय देश नियंत्रण रखता है.
ईरान कहता है कि उसे होर्मुज पर इनोसेंट पैसेज का अधिकार है. इसलिए वो यहां से गुजर रहे जहाज पर कंट्रोल लगा सकता है.
लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून विशेषज्ञ इस दलील से सहमत नहीं हैं. उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए इस्तेमाल होने वाले स्ट्रेट में ट्रांजिट पैसेज का अधिकार लागू होता है, जिसके तहत जहाजों से टोल नहीं लिया जा सकता.
वेस्टमिंस्टर लॉ स्कूल में इंटरनेशनल लॉ के प्रोफेसर मार्को रोसिनी ने एएफपी को बताया है कि, "हालांकि ईरान ने UNCLOS को कभी मंज़ूरी नहीं दी है, फिर भी 'ट्रांज़िट पैसेज सिस्टम को आम तौर पर इंटरनेशनल कस्टमरी लॉ का हिस्सा माना जाता है. रोसिनी ने कहा कि जलडमरूमध्य को पार करने के लिए फीस लेना किसी भी वैध कानूनी आधार के बिना किया जाने वाला कदम होगा."
नॉर्थ कैरोलिना की कैंपबेल यूनिवर्सिटी के समुद्री इतिहासकार सैल मर्कोग्लियानो ने एपी से कहा कि, "अंतरराष्ट्रीय कानून में कहीं भी ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि कोई टोल बूथ बनाकर जहाज़ों से जबरदस्ती वसूली की जाए."
गल्फ़ कोऑपरेशन काउंसिल के महासचिव जासेम मोहम्मद अल-बुदैवी ने कहा कि जहाजों को गुजरने देने के लिए ईरान द्वारा फीस वसूलना एक आक्रामकता है और समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र समझौते का उल्लंघन है.
समुद्र में किन किन रास्तों पर लगता है टोल जैसा चार्ज
ऐसा नहीं है कि दुनिया में समुद्री रास्तों से गुजरने वाले देशों से टोल नहीं वसूला जाता है. दुनिया में समुद्र के रास्तों पर टोल वसूली सीमित परिस्थितियों में ही वैध मानी जाती है. UNCLOS के अनुसार मानव-निर्मित नहरों और कुछ विशेष समझौतों वाले मार्गों पर शुल्क वसूला जाता है. यहां स्ट्रेट और कैनाल का अंतर समझना जरूरी है.नहरों पर टोल लेना वैध है, क्योंकि इसका निर्माण किसी देश ने किया और इसपर खर्च किया और इसे मैनेज करता है.जबकि स्ट्रेट प्राकृतिक संरचना है.
नहरों में टोल वसूली का सबसे प्रमुख उदाहरण हैं-
स्वेज नहर (मिस्र): यह मानव-निर्मित नहर है, इसलिए जहाजों से नेविगेशन शुल्क लिया जाता है.
पनामा नहर (पनामा): अटलांटिक और प्रशांत महासागर को जोड़ने वाली नहर है. यहां पर नियमित टोल लगता है.
कील नहर (जर्मनी): यूरोप के भीतर जहाजों की दूरी कम करने वाली नहर, यहां भी शुल्क लिया जाता है.
इसके अलावा Bosporus Strait और Dardanelles Strait पर तुर्की को कुछ प्रशासनिक शुल्क लेने का अधिकार है, हालांकि यह पूर्ण टोल टैक्स नहीं माना जाता है.






















