- छत्तीसगढ़ वन मंडल घोटाला: शिकायतों के बावजूद जांच नहीं, मंत्री के हस्तक्षेप के आरो
- मनेन्द्रगढ़, मरवाही, बैकुंठपुर, सूरजपुर और अंबिकापुर वन मंडलों में कथित घोटालों की जांच नहीं होने पर सवाल। शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
मनेन्द्रगढ़।रायपुर। अब्दुल सलाम क़ादरी। छत्तीसगढ़ के विभिन्न वन मंडलों में कथित वित्तीय अनियमितताओं और निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। मनेन्द्रगढ़, मरवाही, बैकुंठपुर, सूरजपुर, अंबिकापुर तथा गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान से जुड़े कई मामलों में शिकायतें किए जाने के बावजूद जांच आगे नहीं बढ़ने का आरोप लगाया जा रहा है।
40 से 50 प्रतिशत की कमीशन खोरी?
शिकायतकर्ता का दावा है कि गोंडवाना मरीन फॉसिल्स पार्क, महुआ योजना, एक पेड़ मा के नाम, वन महोत्सव, स्टॉप डैम, तालाब निर्माण, वृक्षारोपण, फेंसिंग वायर एवं पोल खरीदी सहित कई योजनाओं में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
मंत्री के मौखिक निर्देश का दावा
सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कथित रूप से इन मामलों की जांच को आगे नहीं बढ़ाने के मौखिक निर्देश दिए है?
समाचार प्रकाशित किए जाने से पहले मंत्री का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
सीसीएफ सरगुजा वन वृत्त भी उठे सवाल
शिकायतकर्ता का कहना है कि कई मामलों में सीसीएफ अंबिकापुर कार्यालय को लिखित शिकायतें भेजी गईं, लेकिन अब तक न तो जांच दल गठित किया गया और न ही शिकायतकर्ताओं को जांच की स्थिति से अवगत कराया गया।
पहले भी उठ चुके हैं गुणवत्ता पर सवाल
मनेन्द्रगढ़ वन मंडल में स्टॉप डैम निर्माण, जेसीबी से तालाब निर्माण की गुणवत्ता को लेकर पहले भी समाचार प्रकाशित हो चुके हैं। पहली बारिश में निर्माण क्षतिग्रस्त होने की शिकायतों के बाद विभाग ने जांच की बात कही थी। इसी प्रकार महुआ संरक्षण अभियान और वन महोत्सव से जुड़े कार्य भी समय-समय पर चर्चा में रहे हैं।
निष्पक्ष जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि मनेन्द्रगढ़, मरवाही, बैकुंठपुर, सूरजपुर, अंबिकापुर तथा गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान में कराए गए सभी विकास कार्यों की स्वतंत्र एजेंसी, उच्च स्तरीय समिति अथवा सक्षम जांच एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उसके विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जानी चाहिए।
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वही पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने कहा है कि अवैध कटाई सहित इन मामलों पर कार्यवाही होनी चाहिए.





















