मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर। हसदेव एरिया के झगराखंड सब एरिया में पदस्थ एक कर्मचारी दिनेश मिश्रा की नियुक्ति को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि दिनेश मिश्रा की नियुक्ति फर्जी तरीके से की गई है और नियुक्ति से संबंधित दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संबंधित कर्मचारी लंबे समय से कोल इंडिया के अधीन कार्यरत हैं तथा उनकी नियुक्ति को लेकर पूर्व में भी कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं। शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि प्रत्येक बार मामला प्रभाव और पैसों के दम पर दबा दिया गया और कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
वर्तमान में दिनेश मिश्रा के झगराखंड सब एरिया में पी.ई. पद पर कार्यरत होने की बात सामने आ रही है। शिकायतकर्ताओं ने अब पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी CBI तथा संबंधित विजिलेंस विभाग से कराने की मांग की है।
नियुक्ति के मूल दस्तावेजों की जांच की मांग
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक जांच के दौरान नियुक्ति के समय प्रस्तुत किए गए सभी मूल दस्तावेजों का विधिवत मिलान कराया जाना चाहिए। इसमें विशेष रूप से—
- नियुक्ति आवेदन एवं नियुक्ति आदेश
- अभ्यर्थी का पूरा नाम एवं पद
- पिता एवं माता का नाम
- जन्मतिथि
- अंकसूची एवं शैक्षणिक प्रमाण-पत्र
- पहचान संबंधी दस्तावेज
- नियुक्ति के समय प्रस्तुत अन्य अभिलेख
- संबंधित चयन/भर्ती प्रक्रिया के दस्तावेज की जांच शामिल होनी चाहिए।
इसके अलावा शिकायत में यह भी मांग की गई है कि जिस आधार पर और जिन दस्तावेजों के माध्यम से संबंधित व्यक्ति को नौकरी मिली, उनकी प्रमाणिकता तथा नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों/व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जाए।
दस्तावेजों के सत्यापन से सामने आ जाएगा सच
शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि नियुक्ति के समय प्रस्तुत दस्तावेजों का संबंधित बोर्ड, संस्था अथवा विभाग के मूल रिकॉर्ड से सत्यापन कराया जाए तो पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सकती है। साथ ही, यदि किसी दस्तावेज में फर्जीवाड़ा अथवा कूटरचना पाई जाती है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जानी चाहिए।
CBI और विजिलेंस से निष्पक्ष जांच की मांग-
शिकायतकर्ता ने CBI एवं कोल इंडिया के विजिलेंस विभाग से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए। उनका कहना है कि जांच पूरी होने तक नियुक्ति से संबंधित सभी मूल रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं, ताकि किसी भी प्रकार के दस्तावेजी साक्ष्य से छेड़छाड़ की संभावना न रहे।
हालांकि, दिनेश मिश्रा के खिलाफ लगाए गए नियुक्ति संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले में संबंधित कर्मचारी, प्रबंधन अथवा कोल इंडिया का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
अब सवाल यह है कि क्या CBI अथवा विजिलेंस विभाग इस शिकायत को संज्ञान में लेकर नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच करेगा?
विजिएलेन्स क्या कहता है- झगराखंड सब एरिया में पदस्थ दिनेश मिश्रा की कथित नियुक्ति को लेकर उठ रहे सवालों के संबंध में जब SECL विजिलेंस से संपर्क किया गया, तो विजिलेंस अधिकारियों की ओर से मामले की जांच किए जाने की बात कही गई है।
विजिलेंस की ओर से कहा गया है कि शिकायत से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों की जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पूर्व में हुए समस्त शिकायतो के बारे में कुछ भी नही कहा?
फिलहाल मामले में SECL विजिलेंस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।






















