भोपाल.
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने भोपाल-आगरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे परियोजना को औपचारिक मंजूरी प्रदान कर दी है। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच यातायात को सुगम और तेज बनाने के उद्देश्य से तैयार की जा रही यह परियोजना दोनों राज्यों के औद्योगिक, व्यापारिक और पर्यटन संबंधों को नई रफ्तार देगी।
बुंदेलखंड को एनसीआर से जोड़ेगा औद्योगिक गलियारा
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और मप्र औद्योगिक विकास निगम के अनुसार, इस कॉरिडोर के निर्माण से माल ढुलाई की लागत में भारी कमी आएगी। इससे स्थानीय व्यापारियों और कृषि उत्पादकों को देश के बड़े बाजारों तक आसान पहुंच मिलेगी। साथ ही, बुंदेलखंड क्षेत्र के दूरस्थ इलाकों को सीधे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) से जुड़ने का अवसर मिलेगा। एक्सप्रेस-वे के आसपास नए औद्योगिक गलियारे बनाने पर भी तेजी से काम चल रहा है।
3 साल में निर्माण पूरा करने का लक्ष्य
सड़क परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी और आवश्यक प्रशासनिक स्वीकृतियां प्राप्त करने की प्रक्रिया विभिन्न चरणों में तेजी से जारी है। इस नए कॉरिडोर को अत्याधुनिक सुरक्षा मानकों के आधार पर डिजाइन किया गया है। इसमें स्वचालित यातायात प्रबंधन प्रणाली (एटीएमएस) लागू की जाएगी, जिससे हादसों की आशंका न्यूनतम रहेगी। अधिकारियों का दावा है कि निर्माण कार्य आगामी तीन वर्षों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।
प्रोजेक्ट की खास बातें
समय और लागत: 15,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से तैयार होने वाले इस फोरलेन कॉरिडोर से भोपाल से आगरा का सफर 12-13 घंटे से घटकर केवल 7 घंटे रह जाएगा।
रूट नेटवर्क: यह एक्सप्रेस-वे मध्य प्रदेश के विदिशा और सागर जिलों से गुजरते हुए उत्तर प्रदेश के महोबा और झांसी सीमा से कनेक्ट होगा।
आधुनिक सुविधाएं: मार्ग पर विश्राम स्थल, ई-वाहन चार्जिंग स्टेशन, आपातकालीन चिकित्सा केंद्र और लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित किए जाएंगे।






















