September 13, 2026 2:27 am

भारत ने खेला बड़ा दांव, होर्मुज जीता, अब रूस से मिलेगा LNG का खजाना

नईदिल्ली /मॉस्को

 मिडिल ईस्ट में मची भीषण तबाही की आग अब भारत की रसोई से लेकर फैक्ट्रियों तक पहुंच चुकी है. रॉयटर्स की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार ने अपनी तेल और गैस कंपनियों को साफ कह दिया है कि वे रूस से एलएनजी (LNG) खरीदने के लिए अपनी कमर कस लें. यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से इसे भारत का अब तक का सबसे बड़ा ‘पॉलिसी चेंज’ माना जा रहा है. मिडिल ईस्ट के बिगड़ते हालात ने दुनिया भर के देशों को मजबूर कर दिया है कि वो तेल और गैस के लिए दूसरे विकल्प तलाशें. हालांकि, भारत को हॉर्मुज के रास्ते से ‘फ्री पास’ मिला हुआ है, लेकिन सरकार एनर्जी सप्लाई के मामले में अब कोई भी रिस्क लेने के मूड में नहीं है। 

Oil Prices को काबू में रखने का निकाला उपाय
कतर के ‘रास लफ्फान’ गैस हब पर हमलों से उत्पादन सालों के लिए पिछड़ गया है. 19 मार्च को नई दिल्ली में रूसी ऊर्जा उप-मंत्री पावेल सोरोकिन और हरदीप सिंह पुरी के बीच हुई बैठक में एलएनजी सप्लाई फिर से शुरू करने पर सहमति बनी है। 

अमेरिका से शुरू हुई क्या बात?
भारत ने अमेरिका के साथ बातचीत शुरू कर दी है ताकि रूसी गैस खरीदने पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का असर न पड़े. अमेरिका पहले ही भारत को रूसी कच्चा तेल खरीदने के लिए 30 दिनों का वेवर दे चुका है ताकि ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतें काबू में रहें। 

अब भारत एलएनजी के लिए भी ऐसी ही छूट चाहता है. हालांकि, जानकारों का कहना है कि इस बार रूस के साथ होने वाला सौदा 2012 के GAIL-Gazprom समझौते जितना सस्ता नहीं होगा, क्योंकि अब यह पूरी तरह ‘सेलर्स मार्केट’ है। 

भारत-रूस क्रूड ऑयल ट्रेड
S&P ग्लोबल और अन्य एजेंसियों ने दुनिया भर में गैस की कमी की चेतावनी दी है. होर्मुज संकट और कतर में तबाही के कारण इस साल ग्लोबल सप्लाई में 35 मिलियन टन की कमी आ सकती है. कतर और यूएई के नए गैस प्रोजेक्ट्स अब 3 से 5 साल की देरी से चल सकते हैं. भारत पहले ही फरवरी के बाद से रूस से 5-6 करोड़ बैरल कच्चा तेल खरीद चुका है और अब कुकिंग गैस यानी LPG के साथ-साथ एलएनजी के लिए भी रूस पर भरोसा बढ़ा रहा है। 

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Author: Editor

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