- हसदेव एरिया के राजनगर सब एरिया अंतर्गत झिमर-मलगा 9 एवं 10 की डबल स्टोरी डिस्मेंटल कॉलोनी का मामला
राजनगर/हसदेव। हसदेव एरिया के राजनगर सब एरिया अंतर्गत आने वाली झिमर-मलगा 9 एवं 10 की डिस्मेंटल कॉलोनी की डबल स्टोरी इमारतों से दरवाजे और खिड़कियां निकाले जाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि उक्त सामग्री को बिना किसी स्पष्ट टेंडर/वर्क ऑर्डर और सक्षम वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति के निकाला जा रहा है।
मामले की वास्तविक स्थिति जानने के लिए राजनगर सब एरिया के मोबाइल नंबर 9425533509 पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। इसके कारण संबंधित विभाग का पक्ष तत्काल सामने नहीं आ पाया।
वर्करों ने बताया ठेकेदार के माध्यम से हो रहा काम
मौके पर कार्य कर रहे वर्करों से पूछताछ किए जाने पर उनके द्वारा कथित तौर पर बताया गया कि दरवाजे-खिड़कियां निकालने का कार्य ठेकेदार के माध्यम से कराया जा रहा है। हालांकि, सवाल यह है कि यदि कार्य ठेकेदार के माध्यम से हो रहा है तो संबंधित ठेकेदार का नाम, वर्क ऑर्डर, टेंडर प्रक्रिया और सामग्री निकासी की अनुमति क्या है?
स्थानीय स्तर पर इन जानकारियों को स्पष्ट नहीं किया जा रहा है और ठेकेदार का नाम भी सामने नहीं आने की बात कही जा रही है।
सामग्री की निकासी पर उठ रहे सवाल
डिस्मेंटल भवनों से निकलने वाले दरवाजे, खिड़कियां और अन्य उपयोगी सामग्री कंपनी की संपत्ति हो सकती है। ऐसे में उनकी निकासी एवं निस्तारण की प्रक्रिया क्या निर्धारित नियमों के अनुसार हो रही है, यह जांच का विषय है।
यदि इस कार्य के लिए बाकायदा टेंडर, वर्क ऑर्डर अथवा सक्षम अधिकारी की स्वीकृति जारी की गई है तो संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक होने से स्थिति स्पष्ट हो सकती है। वहीं यदि ऐसी कोई अनुमति नहीं है तो बिना अनुमति सामग्री निकाले जाने के मामले में जिम्मेदारी तय किए जाने की आवश्यकता होगी।
जांच के बाद ही साफ होगी वास्तविक तस्वीर
मामले में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि—
- दरवाजे-खिड़कियां निकालने का वर्क ऑर्डर किसके नाम जारी हुआ?
- संबंधित कार्य का टेंडर हुआ या नहीं?
- ठेकेदार का नाम और फर्म क्या है?
- सामग्री निकालने की अनुमति किस सक्षम अधिकारी ने दी?
- निकाली गई सामग्री का स्टॉक/रिकॉर्ड में उल्लेख किया गया है या नहीं?
- सामग्री को कहां ले जाया जा रहा है?
- अब तक कितनी सामग्री निकाली जा चुकी है?
इन बिंदुओं पर विभागीय दस्तावेजों और मौके की जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
खबर 30 दिन और बीबीसी लाईव की ओर से संबंधित अधिकारियों से मामले की आधिकारिक जानकारी एवं दस्तावेज मिलने पर उनका पक्ष भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।






















