October 8, 2026 9:30 pm

पारसा कोल माइंस के CA प्लांटेशन पर सवाल, गड्ढों से लेकर फेंसिंग तक जांच की मांग

  • 60 लाख रुपये के प्लांटेशन में गड़बड़ी के आरोप! कागजों में 12,690 पौधे, मौका निरीक्षण में कम मिले पौधे; गड्ढों के मानकों पर भी सवाल
  • पारसा ओपन कास्ट कोल माइंस से जुड़े प्रतिपूरक वनीकरण कार्य का मामला, 60.48 लाख रुपये की अनुमानित लागत वाले प्लांटेशन की निष्पक्ष जांच की मांग

खोजी रिपोर्ट | खबर 30 दिन। बीबीसी लाईव

अब्दुल सलाम क़ादरी। मनेंद्रगढ़, छत्तीसगढ़। सरकारी योजनाओं में लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि जमीनी स्तर पर काम निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिलता, तो जवाबदेही तय होना जरूरी है। मनेंद्रगढ़ वन मंडल के खड़गवां वन परिक्षेत्र अंतर्गत थग्गांव में किए जा रहे प्रतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) के एक प्लांटेशन को लेकर ऐसे ही गंभीर सवाल सामने आए हैं।

खबर 30 दिन की टीम द्वारा किए गए मौका निरीक्षण में पौधों की संख्या कम होने और गड्ढों की खुदाई निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं होने की स्थिति सामने आने का दावा है। वहीं, परियोजना से संबंधित उपलब्ध कार्य-अनुमान में कुल 60,48,019.35 रुपये की राशि दर्ज है। ऐसे में सवाल उठता है कि लाखों रुपये की इस योजना में स्वीकृत कार्यों का कितना हिस्सा वास्तव में निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरा किया गया है?

60.48 लाख रुपये की परियोजना, जमीन पर काम की गुणवत्ता पर सवाल

इस प्लांटेशन का नाम “Irrigated CA Plantation Thaggaon Patch G, 12.69 Ha” दर्ज है। परियोजना पारसा ओपन कास्ट कोल माइंस (5 MTPA) से संबंधित प्रतिपूरक वनीकरण कार्य है।

उपलब्ध परियोजना विवरण के अनुसार, प्लांटेशन के लिए 12.69 हेक्टेयर क्षेत्र निर्धारित किया गया है और 12,690 पौधे लगाने का लक्ष्य दर्ज है। कार्य-अनुमान की तिथि 25 नवंबर 2025 तथा स्वीकृति तिथि भी 25 नवंबर 2025 दर्ज है।

लेकिन मौका निरीक्षण में पौधों की संख्या और गड्ढों की गुणवत्ता को लेकर जो सवाल सामने आए हैं, वे इस परियोजना के क्रियान्वयन की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता दर्शाते हैं।

कागजों में 12,690 पौधे, मौका निरीक्षण में कम मिलने का दावा

परियोजना के उपलब्ध विवरण में सात प्रजातियों के पौधों की संख्या इस प्रकार दर्ज है:

पौधों की प्रजाति
दर्ज संख्या
जामुन
100
अर्जुन
800
बहेड़ा
950
आंवला
1,390
बांस
1,600
सागौन
6,200
गम्हार
1,650
कुल
12,690

यहां सबसे बड़ा सवाल है कि जब परियोजना में 12,690 पौधों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, तो मौका निरीक्षण के दौरान आधे से कम पौधे मिलने की स्थिति क्यों सामने आई?

क्या निर्धारित संख्या में पौधरोपण किया गया? यदि पौधे लगाए गए थे, तो वर्तमान में कितने जीवित हैं? क्या पौधों की सुरक्षा और सिंचाई के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं?

इन सवालों का जवाब स्वतंत्र भौतिक सत्यापन, पौधों की प्रजातिवार गिनती और संबंधित विभागीय अभिलेखों की जांच से मिलना चाहिए।

गड्ढों की खुदाई में मानकों की अनदेखी का आरोप

पौधरोपण की सफलता के लिए केवल पौधों की संख्या पर्याप्त नहीं होती। गड्ढों का आकार, गहराई, पौधों के बीच की दूरी और मिट्टी की स्थिति , गोबर खाद इत्यादि भी महत्वपूर्ण होती है।

 बीबीसी लाईव। खबर 30 दिन- की टीम के मौका निरीक्षण में गड्ढों की खुदाई निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं होने की बात सामने आई है। इस स्थिति में यह जांचना जरूरी है कि स्वीकृत प्राक्कलन में निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार कार्य किया गया या नहीं।

उपलब्ध कार्य-अनुमान में 12,690 गड्ढों की खुदाई के लिए प्रति गड्ढा 42.60 रुपये की दर से कुल 5,40,594 रुपये की राशि दर्ज है।

अब सवाल है कि क्या सभी गड्ढे निर्धारित माप के अनुसार खोदे गए? क्या कार्य की गुणवत्ता का निरीक्षण हुआ? क्या भुगतान से पहले गड्ढों की संख्या और माप का सत्यापन किया गया?

यदि जांच में गड़बड़ी प्रमाणित होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित कार्य एजेंसी की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

फेंसिंग के लिए करीब 38.98 लाख रुपये, मौके पर हो वास्तविक नही है?परियोजना के उपलब्ध अनुमान में चेन-लिंक फेंसिंग के लिए 3,925.850 रनिंग मीटर कार्य और 38,98,369.05 रुपये की राशि दर्ज है। यह कुल अनुमानित लागत का बड़ा हिस्सा है। तार की मोटाई एमएम वजन के अनुसार नही है?

ऐसे में फेंसिंग की वास्तविक लंबाई, उपयोग की गई सामग्री, खंभों की संख्या और निर्माण की गुणवत्ता का मौके पर सत्यापन बेहद जरूरी है।

क्या निर्धारित लंबाई में फेंसिंग की गई? क्या सामग्री की गुणवत्ता स्वीकृत मानकों के अनुरूप है? क्या माप पुस्तिका में दर्ज मात्रा वास्तविक कार्य से मेल खाती है?

इन सवालों की जांच के बिना फेंसिंग पर खर्च की गई राशि के वास्तविक उपयोग का आकलन नहीं किया जा सकता।

नर्सरी, बोरवेल और सौर पंप की भी हो जांच

परियोजना के अनुमान में कई अन्य कार्यों के लिए भी राशि दर्ज है। इनमें प्रमुख रूप से:

  • नर्सरी कार्य — 3,24,356.40 रुपये
  • गड्ढों की खुदाई — 5,40,594 रुपये
  • मिट्टी भरने का कार्य — 4,45,419 रुपये
  • बोरवेल की खुदाई — 1,37,500 रुपये
  • सौर पंप एवं संबंधित उपकरण — 4,40,000 रुपये

इन सभी कार्यों का मौके पर सत्यापन किया जाना चाहिए। यह भी देखा जाना चाहिए कि बोरवेल और सौर पंप वास्तव में स्थापित हैं या नहीं, सिंचाई व्यवस्था काम कर रही है या नहीं और पौधों के जीवित रहने के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध है या नहीं।

पांच बिंदुओं पर जांच से सामने आ सकती है वास्तविक स्थिति

  1. पौधों की गिनती: 12,690 पौधों के लक्ष्य के मुकाबले मौके पर कितने पौधे मौजूद हैं और कितने जीवित हैं?
  2. गड्ढों की माप: गड्ढों का आकार, गहराई और दूरी निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप है या नहीं?
  3. फेंसिंग का सत्यापन: 3,925.850 रनिंग मीटर के प्रस्तावित कार्य की वास्तविक लंबाई और गुणवत्ता क्या है?
  4. खर्च का मिलान: माप पुस्तिका, बिल, वाउचर और भुगतान अभिलेखों में दर्ज मात्रा वास्तविक कार्य से मेल खाती है या नहीं?
  5. अधिकारियों की जवाबदेही: कार्य का निरीक्षण, सत्यापन और गुणवत्ता नियंत्रण किन अधिकारियों ने किया तथा उनकी रिपोर्ट में क्या दर्ज है?
  6. मजदूरी भुगतान दर्ज नाम का सत्यापन

प्रतिपूरक वनीकरण का उद्देश्य पूरा हुआ या केवल लक्ष्य तक सीमित रहा?

प्रतिपूरक वनीकरण का उद्देश्य पर्यावरणीय क्षति की भरपाई के लिए पौधरोपण करना और उन्हें जीवित रखने की व्यवस्था सुनिश्चित करना है। यदि पौधों की संख्या कम मिलती है या गड्ढों की खुदाई निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई जाती, तो यह परियोजना की गुणवत्ता और निगरानी से जुड़ा गंभीर प्रश्न है।

खबर 30 दिन। बीबीसी लाईव की मांग है कि संबंधित वन विभाग इस प्लांटेशन का निष्पक्ष भौतिक सत्यापन कराए। पौधों की प्रजातिवार गिनती, गड्ढों की तकनीकी माप, फेंसिंग की वास्तविक लंबाई और सभी प्रमुख मदों में दर्ज खर्च का मिलान किया जाए। जांच में किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होने पर जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

अब विभाग को देना होगा जवाब

60,48,019.35 रुपये की अनुमानित लागत वाली इस एक परियोजना में पौधों की संख्या और गड्ढों की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

ऐसे ही दर्जनों और भी प्लांटेशन है जिनका एक एक करके खबर प्रकाशित किया जाएगा।

संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट करना चाहिए कि कार्य का निरीक्षण कब-कब हुआ, कितने पौधों का सत्यापन किया गया और निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच किस आधार पर की गई।

खबर 30 दिन इस मामले में उपलब्ध तथ्यों, मौका निरीक्षण और विभागीय रिकॉर्ड के आधार पर आगे भी पड़ताल जारी रखेगा।

प्लांटेशन कार्य में तत्कालीन प्रशिक्षु SDO मयंक सिंह की भूमिका भी जांच के दायरे में

इस पूरे मामले में प्लांटेशन कार्य को संपादित कराने वाले तथा प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले तत्कालीन प्रशिक्षु SDO मयंक सिंह की भूमिका को लेकर भी विभागीय स्तर पर स्पष्टता जरूरी है। 60,48,019.35 रुपये की अनुमानित लागत वाले इस कार्य में पौधरोपण, गड्ढों की खुदाई, फेंसिंग और अन्य गतिविधियों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किन अधिकारियों को सौंपी गई थी, इसकी जांच होनी चाहिए।

खबर 30 दिन की टीम द्वारा किए गए मौका निरीक्षण में पौधों की संख्या कम मिलने और गड्ढों की खुदाई निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं होने संबंधी सवाल सामने आए हैं। ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि SDO मनीष सिंह की इस कार्य में आधिकारिक भूमिका क्या थी, उन्होंने किन गतिविधियों का निरीक्षण या सत्यापन किया और कार्य की गुणवत्ता के संबंध में क्या रिपोर्ट प्रस्तुत की।

विभाग को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि कार्य की निगरानी, तकनीकी सत्यापन और भुगतान की अनुशंसा किन अधिकारियों ने की। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

बड़ा सवाल: जब सिर्फ एक प्लांटेशन पर ही 60 लाख रुपये से अधिक की अनुमानित राशि दर्ज है, तो क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने स्थल पर पौधों की संख्या, गड्ढों के मानक और फेंसिंग की गुणवत्ता का समुचित सत्यापन किया था? ऐसे दर्जनों प्लांटेशन है जिनमे करोङो का घोटाला हो चुका है , SDO मनीष सिंह की भूमिका सहित पूरे मामले की निष्पक्ष जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। मुख्यमंत्री को शिकायत भेजने पर भी आज तक जांच लम्बित है ..? 

BBC LIVE
Author: BBC LIVE

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