September 11, 2026 9:47 pm

बंगाल में सख्त संदेश—बुलडोजर पॉलिटिक्स की कोई जगह नहीं: Abhishek Banerjee

कोलकाता
तृणमूल कांग्रेस के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की बुलडोजर शैली की राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है। अपने एक्स हैंडल का इस्तेमाल करते हुए बनर्जी ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा राज्य में कई प्रशासनिक बदलाव किए जाने के बाद शुक्रवार को राम नवमी के जुलूस के दौरान मुर्शिदाबाद जिले के रघुनाथगंज में हिंसा हुई। बनर्जी ने कहा कि भाजपा बंगाल की धरती पर इसी तरह का 'परिवर्तन' थोपना चाहती है। चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद चुनाव आयोग ने व्यापक प्रशासनिक बदलाव शुरू कर दिए और मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी, एडीजी, आईजी, एसपी, डीएम, कोलकाता पुलिस कमिश्नर और यहां तक ​​कि केएमसी कमिश्नर को भी बदल दिया। इस तरह के अभूतपूर्व हस्तक्षेप से इरादे और समय को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि इसके बाद जो हुआ है वह और भी चिंताजनक है। इन बदलावों की आड़ में, धमकियों की घटनाएं बढ़ रही हैं, दुकानों में तोड़फोड़ हो रही है, धर्म के नाम पर तनाव भड़काया जा रहा है और आम लोगों को परेशान किया जा रहा है। हमें 'बुलडोजर मॉडल' की जरूरत नहीं है। हमें नफरत और हिंसा की आयातित राजनीति की जरूरत नहीं है। तृणमूल कांग्रेस नेता के अनुसार हमारी पहचान हमारी साझी संस्कृति, हमारे मिलजुल कर मनाए जाने वाले कार्यक्रम, एक-दूसरे की मान्यताओं के प्रति हमारा सम्मान है।

उन्होंने समाज में सांप्रदायिक सद्भाव के महत्व पर भी प्रकाश डाला और बताया कि पश्चिम बंगाल ने इस दिशा में किस प्रकार अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि कई पीढ़ियों से बंगाल दुर्गा पूजा, दिवाली, पोइला बोइशाख, ईद, गुरु नानक जयंती, बुद्ध पूर्णिमा और क्रिसमस बिना किसी भय, विभाजन या हिंसा के एक साथ मनाता आया है। फिर भी पिछले कुछ दिनों में हमें क्रांतिकारियों की इस भूमि पर थोपे जा रहे 'परिवर्तन' की एक भयावह झलक देखने को मिल रही है। बनर्जी ने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर और स्वामी विवेकानंद की भूमि हमेशा से सहिष्णुता, सद्भाव और सहअस्तित्व की प्रतीक रही है। दशकों से बंगाल विविधता में एकता का जीता-जागता उदाहरण रहा है।

बनर्जी ने अपनी पोस्ट में कहा कि इस तरह की राजनीति से किसी को भी लाभ नहीं मिलना चाहिए। आज, वही सामाजिक ताना-बाना तनाव में दिखाई दे रहा है। सवाल यह है कि इस व्यवधान से किसे लाभ हो रहा है और बंगाल की जनता को इसकी कितनी कीमत चुकानी पड़ रही है? चुनाव आयोग और भाजपा पर शर्म आती है!

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Author: Editor

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