May 3, 2026 9:26 pm

ग्लोबल वॉर्मिंग आज अलार्मिंग हो चुकी है, यह मुख्य चुनौती बनकर आई है सामने

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रकृति अनुकूल स्थापत्य हमारे वास्तु का आधार है। वर्तमान समय की बड़ी चुनौती यह है कि हम कंक्रीट के बढ़ते जंगलों और सिमटते प्राकृतिक संसाधनों के बीच खड़े हैं। पर्यावरण अनुकूल निर्माण को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। हमें गर्व होना चाहिए कि हम उस परंपरा के उत्तराधिकारी हैं जिन्होंने स्वस्थ नगर नियोजन के साथ जल संरक्षण के लिए विशाल इकोलॉजिकल सिस्टम बनाये। विद्वान, वास्तुकार राजा भोज द्वारा विकसित भोपाल इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। सौभाग्य का विषय है कि सस्टेनेबल फ्यूचर इनोवेशंस इन ग्रीन बिल्डिंग प्रैक्टिसेस जैसे विषय पर भोपाल में राष्ट्रीय सेमिनार हो रहा है। प्रदेश के ऐतिहासिक स्थल मांडव के जल प्रबंधन और नगर नियोजन को देखते हुए वहां भी इस प्रकार के आयोजन होने चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर अखिल भारतीय सेमिनार और इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस की 113 गवर्निंग कॉउंसिल मीटिंग के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। लोक निर्माण विभाग तथा इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस, कार्यक्रम के आयोजक हैं।

पी.डब्ल्यू.डी. की स्मारिका, न्यूज लेटर और आईबीसी की बिल्ट इन्वायरमेंट पत्रिका का विमोचन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने शॉल-फल और स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम वंदे-मातरम के गान के साथ आरंभ हुआ। इस अवसर पर आईबीसी इनोग्रल सॉन्ग और लोक निर्माण विभाग की परियोजना क्रियान्वयन इकाई की गतिविधियों पर लघु फिल्म की प्रस्तुति हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोक निर्माण विभाग की स्मारिका, न्यूज लेटर और आईबीसी की बिल्ट इन्वायरमेंट पत्रिका का विमोचन किया। उनकी उपस्थिति में आईआईटी इंदौर और लोक निर्माण विभाग के बीच निर्माण तकनीक पर केंद्रित एमओयू का आदान-प्रदान किया गया। दूसरा एमओयू लोक निर्माण विभाग तथा गृहा संस्था के साथ किया गया।

हम प्रकृति से सीखें और उसके साथ आगे बढ़ें

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि राजा भोज ने भोज पत्रों पर लेख और निर्माण कार्यों के माध्यम से हमें प्राचीन भारतीय निर्माण परंपरा की अद्भुत सौगात दी है। राजा भोज ने प्रकृति के साथ प्रगति‍की बात समरांगण सूत्रधार में स्पष्ट की थी। हमारे ग्रंथों में कहा गया है 'यत् पिण्डे तत् ब्रह्माण्डे' अर्थात् जो शरीर में है वही ब्रह्मांड में है। ग्रीन बिल्डिंग, पृथ्वी-जल-अग्नि-वायु-आकाश तत्वों के समावेश से हमारे घरों को उसी ब्रह्मंडीय संतुलन में वापस लाने की एक प्रक्रिया है। हमारे प्राचीन ग्रंथ यह मानते हैं कि एक भवन में इन सब तत्वों का समावेश आवश्यक है। वर्तमान दौर में जीपीएस एक नई तकनीक है, लेकिन पृथ्वी का भौगोलिक केंद्र उज्जैन के पास डोंगला में है। यह प्राचीन काल से समय गणना का मुख्य केंद्र माना जाता है। तत्कालीन गणना की सटीकता इससे सिद्ध होती है कि वर्तमान में भी निश्चित तिथियों पर मौसम में बदलाव का अनुभव किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि तुंगभद्रा नदी के किनारे श्रृंगेरी में भी स्थापत्य कला का अद्भुद उदाहरण देखने को मिलते हैं। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने प्राचीन ज्ञान और परंपरा को मौजूदा दौर में विज्ञान के साथ जोड़ा है। आज आवश्यकता है कि हम प्रकृति से सीखें और उसके साथ आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्राचीन वास्तुकला की विशेषताओं पर चर्चा करते हुए भोपाल के बड़े तालाब और उज्जैन में शिप्रा नदी के आस-पास की संरचनाओं का उल्लेख किया।

अधोसंरचना विकास में राशि का सदुपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकास हमारी प्राथमिकता है, लेकिन अधोसंरचना विकास में राशि का सदुपयोग हो, इन बिन्दुओं के साथ ही हम ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर आगे बढ़ रहे हैं। प्रदेश में पर्यावरण अनुकूल निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। ग्लोबल वॉर्मिंग आज अलार्मिंग हो चुकी है, यह मुख्य चुनौती बनकर सामने आई है। राज्य सरकार ने इस चुनौती का सामना करने में जन-जन की सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गुढ़ी पड़वा से जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरुआत की है। गंगा दशहरा 25 मई को इसके अंतर्गत प्रदेश में कुएं, बाबड़ियों और सभी जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार का कार्य किया जा रहा है। इसमें अधिक से अधिक जनसहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। प्रदेश में सभी ने जल संरचनाओं पर निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया है। मध्यप्रदेश जल संरक्षण कार्यों में देश में प्रथम स्थान पर है। जल संचयन में डिण्डौरी और खंडवा जिले देश में क्रमश: पहले और दूसरे स्थान पर रहे हैं।

सस्टेनेबल फ्यूचर केवल विचार नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है : मंत्री  सिंह

लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में लोक निर्माण विभाग प्रदेश के बेहतर भविष्य के लिए नवाचारों के साथ अधोसंरचना विकास को गति प्रदान कर रहा है। प्रदेश में टिकाऊ निर्माण के लिए भारतीय प्राचीन निर्माण तकनीक पर हम आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री  मोदी ने वैदिक घड़ी को सराहा है। इस घड़ी के निर्माण का श्रेय मुख्यमंत्री डॉ. यादव को जाता है। प्रदेश में बनने वाले सभी भवन अब ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर बनाए जा रहे हैं। लोक निर्माण विभाग ने अपने प्रशिक्षण कैलेंडर में ग्रीन बिल्डिंग तकनीक को शामिल किया है। प्रदेश में हाईवे और फ्लाईओवर्स को रेन वॉटर हार्वेस्टिंग तकनीक के साथ तैयार किया जा रहा है। मंत्री  सिंह ने विशेषज्ञों से आह्वान किया कि मध्यप्रदेश की विविध भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कम लागत वाली ग्रीन बिल्डिंग तकनीकों का विकास किया जाए, जिससे आम नागरिक भी इनका लाभ प्राप्त कर सकें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के प्रयासों से मध्यप्रदेश ग्रीन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा तथा “लोक निर्माण से लोक कल्याण” की परिकल्पना साकार होगी। मंत्री  सिंह ने कहा कि “सस्टेनेबल फ्यूचर” केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है, जिसे हमें आज से ही अपने कार्यों में लागू करना होगा, जिससे आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और संतुलित वातावरण प्रदान किया जा सके।

लोक निर्माण विभाग ने बनाई अपनी नई छवि

प्रमुख अभियंता लोक निर्माण विभाग और आईबीसी मध्यप्रदेश चैप्टर के प्रेसिडेंट  एस.आर. बघेल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की दूरदृष्टि के परिणाम स्वरूप मध्यप्रदेश में अब सभी भवन ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर बन रही हैं। आईबीसी प्रेसिडेंट  चिन्मय देवनाथ ने कहा कि आज इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस की 113 गवर्निंग काउंसिल मीटिंग में ग्रीन बिल्डिंग सामग्री, ऊर्जा दक्षता, प्राकृतिक प्रकाश एवं वेंटिलेशन, स्मार्ट टेक्नोलॉजी, प्रीडिक्टिव मेंटेनेंस, 3D प्रिंटिंग एवं प्री-फैब्रिकेशन जैसे विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श होगा। आयोजन का मुख्य उद्देश्य सेक्टर में आ रही चुनौतियों का हल निकालना है। ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर्यावरण के लिए लाभकारी है। इसमें ऊर्जा संरक्षण और जल संरक्षण पर खास जोर दिया जाता है।

इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस आईबीसी के संस्थापक अध्यक्ष  ओपी गोयल ने कहा कि आईबीसी का भोपाल चैप्टर काफी सक्रियता के साथ काम कर रहा है। यहां इंजीनियरिंग सेक्टर में नए सॉफ्टवेयर और नई तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग ने गंभीरता के साथ कार्य करते हुए अपनी नई छवि बनाई है। हमारा लक्ष्य भारत को अधोसंरचना क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाते हुए विकसित भारत का निर्माण करना है।

कार्यक्रम में प्रमुख सचिव लोक निर्माण  सुखबीर सिंह, भवन विकास निगम के महाप्रबंधक  सीबी चक्रवर्ती, आईबीसी के सचिव कर्नल आनंद मथलेकर सहित लगभग 20 राज्यों के प्रतिनिधि, इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस के प्रतिनिधि, सिटी प्लानर्स, नीति-निर्माता और वरिष्ठ अभियंता उपस्थित थे।

 

 

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Author: Editor

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