अब्दुल सलाम क़ादरी। मनेन्द्रगढ़।
मनेन्द्रगढ़ जिले के जनकपुर क्षेत्र में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के नियमों को ताक पर रखकर नदियों, नालों और जंगलों से खुलेआम अवैध उत्खनन किया जा रहा है। इसके साथ ही कई क्रेशर इकाइयाँ बिना वैध अनुमति और पर्यावरणीय स्वीकृति के संचालित हो रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि खनिज माफियाओं और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के चलते प्रशासनिक कार्रवाई प्रभावहीन बनी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, नदी तटों और वन क्षेत्रों में भारी मशीनों से रेत, गिट्टी और पत्थरों का उत्खनन किया जा रहा है, जिससे प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है। जंगलों में अवैध खनन से वन संपदा को नुकसान पहुंच रहा है, वहीं नदियों और नालों से रेत निकालने से जल स्रोतों पर संकट गहराता जा रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि दिन-रात दौड़ते भारी वाहनों से सड़कें टूट रही हैं और धूल प्रदूषण से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी केवल औपचारिकताओं तक सीमित नजर आ रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, अनियंत्रित उत्खनन से भूजल स्तर गिरने, जल प्रवाह बाधित होने और पर्यावरणीय असंतुलन का खतरा बढ़ जाता है। वहीं अवैध खनन और क्रेशर संचालन के कारण शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन अवैध उत्खनन और नियम विरुद्ध क्रेशर संचालन पर सख्त कार्रवाई करेगा या फिर खनिज माफियाओं का यह खेल यूं ही चलता रहेगा। जनकपुर क्षेत्र में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं और लोग तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।





















