July 17, 2026 2:50 am

धारा 8(1)(ज) और 11 की आड़ में वन विभाग में करोड़ों के घोटालों पर पर्दा?

  • आरटीआई कार्यकर्ताओं का आरोप – मस्टररोल नहीं बनाए जाते, फर्जी मजदूरों के नाम पर भुगतान, सूचना आयोग की भूमिका पर भी उठे सवाल

रायपुर/अब्दुल सलाम क़ादरी

सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 का उद्देश्य शासन-प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, लेकिन आरटीआई कार्यकर्ताओं का आरोप है कि छत्तीसगढ़ के वन विभाग में इसी कानून की धारा 8(1)(ज) एवं धारा 11 का गलत इस्तेमाल कर सरकारी धन के उपयोग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाई जा रही हैं।

आरोप है कि विभाग द्वारा विकास कार्यों में मस्टररोल (हाजिरी पंजी) ही नहीं बनाए जाते। मजदूरों से कार्य कराए जाने के बावजूद उनका नाम, उपस्थिति और भुगतान का रिकॉर्ड तैयार नहीं किया जाता। इससे यह पता लगाना कठिन हो जाता है कि वास्तव में किस व्यक्ति ने कार्य किया और किसे भुगतान किया गया।

आरटीआई कार्यकर्ताओं का दावा है कि मस्टररोल नहीं बनने की स्थिति में फर्जी मजदूर दिखाकर या चहेते लोगों एवं चहेते ठेकेदारों के खातों में सरकारी राशि हस्तांतरित करने की आशंका बढ़ जाती है। उनका कहना है कि जब ऐसे मामलों में भुगतान संबंधी रिकॉर्ड, मस्टररोल, मजदूरों की सूची और अन्य दस्तावेज आरटीआई के माध्यम से मांगे जाते हैं, तब वन विभाग धारा 8(1)(ज) और धारा 11 का हवाला देकर सूचना देने से इनकार कर देता है।

आरटीआई कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकारी कार्यों में लगे मजदूरों के नाम, कार्य का विवरण और भुगतान का रिकॉर्ड सार्वजनिक दस्तावेज होना चाहिए, क्योंकि इन कार्यों का भुगतान जनता के टैक्स के पैसे से किया जाता है। उनका तर्क है कि ऐसे रिकॉर्ड को व्यक्तिगत जानकारी बताकर छिपाना आरटीआई अधिनियम की मूल भावना के विपरीत है।

आरोप है कि इस प्रकार की प्रक्रिया के कारण जनता के टैक्स के पैसों से होने वाले विकास कार्यों का लाभ आम नागरिकों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाता और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। आरटीआई कार्यकर्ताओं का दावा है कि पूरे छत्तीसगढ़ में वन विभाग के कई कार्यों में इसी प्रकार की अनियमितताएं देखने को मिल रही हैं।

उन्होंने राज्य सूचना आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि आयोग कई मामलों में विभागीय अधिकारियों के पक्ष में निर्णय देता है। कुछ सेवानिवृत्त रेंजरों के हवाले से यह भी दावा किया गया है कि आयोग में लंबित प्रकरणों के संबंध में अधिकारियों को बुलाए जाने या संपर्क किए जाने की बातें सामने आती रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और आयोग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।

आरटीआई कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि वन विभाग में मजदूरी भुगतान, मस्टररोल, बैंक खातों में हुए भुगतान तथा संबंधित अभिलेखों की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए। साथ ही, आरटीआई अधिनियम की धाराओं का दुरुपयोग रोकने और सरकारी धन के उपयोग में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

BBC LIVE
Author: BBC LIVE

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