विशेष रिपोर्ट | अब्दुल सलाम क़ादरी
मध्यप्रदेश के उमरिया, शहडोल और अनूपपुर जिलों में बड़े पैमाने पर रेत के अवैध भंडारण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि विभिन्न स्थानों पर हजारों ट्रक रेत का भंडारण किया गया है। यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह केवल अवैध खनन का मामला नहीं, बल्कि राजस्व की संभावित हानि और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय भी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि रेत का भंडारण खुलेआम किया जा रहा है, लेकिन संबंधित विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि कुछ स्थानों पर खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं और रेत माफियाओं के साथ मिलीभगत की आशंका व्यक्त की जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी शेष है।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि इतने बड़े पैमाने पर रेत का भंडारण हुआ है, तो क्या संबंधित स्थलों का निरीक्षण किया गया? क्या भंडारित रेत के वैध दस्तावेज, रॉयल्टी और परिवहन अनुमति की जांच की गई? यदि सब कुछ नियमों के अनुरूप है, तो प्रशासन को इसकी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए, और यदि अनियमितताएं हैं, तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद प्रशासन की ओर से अपेक्षित सक्रियता दिखाई नहीं दे रही है। इसी कारण लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि आखिर ऐसी कौन-सी वजह है जिसके कारण इतने बड़े मामले में भी प्रशासन मौन बना हुआ है।
जनचर्चा में यह व्यंग्यात्मक टिप्पणी भी सुनने को मिल रही है कि “महाकाल की मर्जी के बिना प्रशासन हिल भी नहीं पा रहा है।” यह टिप्पणी लोगों की निराशा और व्यवस्था के प्रति अविश्वास को दर्शाती है, जिसे प्रशासन को गंभीरता से लेना चाहिए।
प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन और खनिज विभाग को चाहिए कि वे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं, सभी अवैध रेत भंडारण स्थलों का सर्वे कराएं, संबंधित अभिलेखों की जांच करें और यदि कहीं भी नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें।






















