September 3, 2026 12:15 am

एथेनॉल के नाम पर जनता की जेब पर डाका? माइलेज घटा, खर्च बढ़ा, आखिर किसके हित में है यह नीति?

विशेष रिपोर्ट | खबर 30 दिन। बीबीसी लाईव

देश में E20, 30 (20 , 30 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को भविष्य का ईंधन बताकर लागू किया जा रहा है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर लाखों वाहन चालकों के बीच नाराज़गी बढ़ती दिखाई दे रही है। लोगों का आरोप है कि E20, 30 पेट्रोल डालने के बाद उनकी गाड़ियों का माइलेज कम हो गया है, जबकि पेट्रोल की कीमतों में कोई उल्लेखनीय राहत नहीं मिली।

वाहन मालिक सवाल उठा रहे हैं कि यदि एथेनॉल अपेक्षाकृत कम लागत में तैयार किया जा सकता है, तो उपभोक्ताओं को सस्ता ईंधन क्यों नहीं मिल रहा? उनका कहना है कि जब जेब से पहले जितना ही पैसा जा रहा है और बदले में माइलेज भी घट रहा है, तो आखिर इस नीति का सबसे बड़ा लाभ किसे मिल रहा है?

कई उपभोक्ताओं का आरोप है कि सरकार ने किसानों और पर्यावरण के नाम पर ऐसी व्यवस्था लागू कर दी है, जिसका आर्थिक बोझ आम जनता उठा रही है। उनका कहना है कि यदि E20, 30 वास्तव में देशहित में है तो सरकार को सार्वजनिक रूप से यह बताना चाहिए कि माइलेज पर इसका वास्तविक प्रभाव क्या है, उपभोक्ताओं को कितना आर्थिक लाभ हुआ है और ईंधन की कीमतों में कमी क्यों नहीं दिखाई दे रही।

सोशल मीडिया पर भी E20 , 30 को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। अनेक लोग दावा कर रहे हैं कि उनकी गाड़ियों की ईंधन खपत बढ़ गई है। हालांकि, इन दावों का प्रभाव वाहन के मॉडल, इंजन की स्थिति और निर्माता द्वारा E20, 30 के समर्थन पर भी निर्भर हो सकता है।

सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रण से कच्चे तेल के आयात में कमी आएगी, किसानों को लाभ मिलेगा और प्रदूषण घटेगा। लेकिन जनता का एक वर्ग पूछ रहा है कि यदि इन दावों के बावजूद आम आदमी का मासिक पेट्रोल खर्च कम नहीं हुआ, तो इस नीति का प्रत्यक्ष लाभ उसे कब मिलेगा?

राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे पर असंतोष दिखाई दे रहा है। कुछ नागरिक खुलकर कह रहे हैं कि महंगाई, बढ़ते ईंधन खर्च और घटते माइलेज ने उन्हें निराश किया है। यह नागरिकों की व्यक्तिगत राय है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या सरकार एथेनॉल के वास्तविक प्रभाव पर स्वतंत्र वैज्ञानिक अध्ययन सार्वजनिक करेगी? क्या उपभोक्ताओं को माइलेज में आई कथित कमी की भरपाई मिलेगी? या फिर आम आदमी लगातार बढ़ते ईंधन खर्च का बोझ उठाने को मजबूर रहेगा?

जब तक इन सवालों के स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब सामने नहीं आते, तब तक E20, 30  पर बहस और जनता की नाराज़गी दोनों जारी रहने की संभावना है।

BBC LIVE
Author: BBC LIVE

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