June 27, 2026 1:24 am

छत्तीसगढ़ में अल नीनो का असर: मानसून पर मंडराया खतरा, खेती और जल संसाधनों पर बढ़ी चिंता

रायपुर। प्रशांत महासागर में विकसित हो रही अल नीनो (El Niño) की स्थिति का असर अब भारत के मानसून पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अल नीनो प्रभावी रहा, तो छत्तीसगढ़ में मानसून की गति और वर्षा का वितरण प्रभावित हो सकता है। हालांकि हाल के दिनों में प्रदेश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय हुआ है और बारिश भी दर्ज की गई है, लेकिन पूरे सीजन में वर्षा सामान्य रहेगी या नहीं, इस पर मौसम वैज्ञानिक लगातार नजर बनाए हुए हैं।

छत्तीसगढ़ को देश का “धान का कटोरा” कहा जाता है। यहां की अधिकांश खेती वर्षा आधारित है। ऐसे में यदि अल नीनो के कारण बारिश कम होती है या लंबे अंतराल के बाद होती है, तो धान की बुआई, अंकुरण और फसल की बढ़वार पर सीधा असर पड़ सकता है। इससे किसानों की लागत बढ़ेगी और उत्पादन घटने की आशंका रहेगी।

विशेषज्ञों के अनुसार अल नीनो के दौरान मानसून कमजोर पड़ सकता है, वर्षा असमान रूप से हो सकती है और कई क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है, जबकि कुछ स्थानों पर अचानक अत्यधिक बारिश भी देखने को मिल सकती है। इस तरह की मौसमीय अस्थिरता जलाशयों, नदियों और भूजल स्तर को भी प्रभावित कर सकती है।

यदि वर्षा सामान्य से कम रहती है तो इसका असर केवल कृषि तक सीमित नहीं रहेगा। पेयजल आपूर्ति, बिजली उत्पादन, पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। कम उत्पादन के कारण खाद्यान्न और सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना भी बनी रहती है।

मौसम विभाग ने फिलहाल प्रदेश में मानसून की गतिविधियां जारी रहने और कई जिलों में बारिश की संभावना जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल शुरुआती बारिश के आधार पर पूरे मानसून का आकलन नहीं किया जा सकता। जुलाई और अगस्त के दौरान वर्षा की स्थिति ही तय करेगी कि अल नीनो का वास्तविक प्रभाव कितना गहरा रहेगा।

कृषि विशेषज्ञ किसानों को सलाह दे रहे हैं कि वे मौसम विभाग के पूर्वानुमानों पर लगातार नजर रखें, समय पर बुआई करें, जल संरक्षण के उपाय अपनाएं तथा कम पानी में तैयार होने वाली फसलों और उन्नत बीजों का उपयोग करें, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके।

अल नीनो छत्तीसगढ़ के लिए चिंता का विषय जरूर है, लेकिन स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। यदि मानसून पूरे सीजन में संतुलित बना रहता है तो प्रभाव सीमित रह सकता है। वहीं यदि अल नीनो मजबूत हुआ, तो राज्य की कृषि, जल संसाधनों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग और कृषि वैज्ञानिक लगातार परिस्थितियों की निगरानी कर रहे हैं।

BBC LIVE
Author: BBC LIVE

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