रायपुर
छत्तीसगढ़ में सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों को कम करने के लिए परिवहन विभाग ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास के सड़क सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र के साथ महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। रायपुर में आयोजित कार्यशाला के दौरान दोनों संस्थानों के बीच डेटा-आधारित हाइपरलोकल इंटरवेंशन कार्यक्रम लागू करने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
पहले चरण में 10 संवेदनशील जिलों पर फोकस
परियोजना के पहले चरण में सड़क दुर्घटनाओं की दृष्टि से सबसे संवेदनशील 10 जिलों की पहचान कर वहां यह मॉडल लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य दुर्घटना संभावित क्षेत्रों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर समय रहते प्रभावी सुरक्षा उपाय लागू करना है।
'संजय' डिजिटल प्लेटफॉर्म से होगी निगरानी
कार्यशाला में जिला प्रशासन, पुलिस, परिवहन, लोक निर्माण विभाग और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को सड़क दुर्घटना डेटा का विश्लेषण, ब्लैक स्पॉट की पहचान, कम लागत वाले अभियांत्रिकी उपायों तथा 'संजय' डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया। इस प्लेटफॉर्म की मदद से दुर्घटना संभावित स्थलों की सटीक पहचान कर साक्ष्य-आधारित निर्णय लिए जा सकेंगे।
सरकार का लक्ष्य सुरक्षित सड़क व्यवस्था
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल सड़क हादसों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि ऐसी सुरक्षित सड़क व्यवस्था विकसित करना है, जिससे हर नागरिक सुरक्षित अपने घर पहुंच सके। उन्होंने इसे सुरक्षित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में अहम पहल बताया।
परिवहन विभाग के सचिव एस. प्रकाश ने कहा कि IIT मद्रास के सहयोग से आधुनिक तकनीक और डेटा विश्लेषण के जरिए सड़क सुरक्षा प्रबंधन को और मजबूत बनाया जाएगा। कार्यशाला में विभिन्न जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों, आरटीओ, डीटीओ, पुलिस अधिकारियों, NIC और जिला सड़क सुरक्षा समिति के प्रतिनिधियों ने भी प्रशिक्षण प्राप्त किया।






















