September 10, 2026 12:04 am

केवल 68 शब्द! शिवाजी महाराज का इतिहास ‘संक्षेप’ करने से महाराष्ट्र सदन में विरोध के स्वर तेज

मुंबई 
छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास को सीबीएसई की किताबों में केवल 68 शब्दों का स्थान मिला है। इस बात पर भड़कते हुए निर्दलीय विधायक सत्यजीत तांबे ने महाराष्ट्र विधान परिषद में कड़ा रोष व्यक्त किया है। सत्यजीत ने राज्य सरकार से इस मुद्दे पर ध्यान देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर सीबीएसई के पास छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़ी जानकारी नहीं है तो राज्य सरकार को इस विषय पर जानकारी देनी चाहिए।

विधान परिषद में इस मुद्दे को उठाते हुए तांबे ने कहा कि केंद्रीय स्कूलों में पाठ्यक्रम में शिवाजी महाराज के पूरे इतिहास को केवल 68 शब्दों में समेट दिया गया है। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज का इतिहास देश भर तक नहीं पहुंच रहा है। यह महाराष्ट्र सरकार और शिक्षा विभाग की विफलता है।

सदन में इस मुद्दे पर आधा घंटा चर्चा की मांग करते हुए तांबे ने कहा, “महाराष्ट्र के आराध्य छत्रपति शिवाजी महाराज का इतिहास अगर देशभर के विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच रहा है, तो यह राज्य के शिक्षा विभाग की विफलता है। शिवाजी महाराज ने राज्य को खड़ा किया। विविध समाज के मावलों को एक साथ लाकर बहुजन हिताय राज्य की स्थापना की। उन्होंने माता जीजाबाई और पिता शाहजी राजेके स्वराज्य के स्वप्न को साकार किया।” तांबे ने सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर इतना प्रेरणादायक और विशाल इतिहास आखिर केवल 68 शब्दों में कैसे समेटा जा सकता है?

तांबे ने आरोप लगाया कि सीबीएसई में अन्य राजाओं के इतिहास का विस्तृत वर्णन दिया गया है। कई ऐसे राजाओं के बारे में भी भर-भरकर लिखा गया है, जिन्होंने अपने जीवन में केवल महल बनवाए थे, तो फिर आखिर छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर राज्य सरकार उदासीन क्यों है?

तांबे की बात को बाद में अन्य सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों का भी समर्थन मिला। सरकार की तरफ से मंत्री डॉक्टर पंकज भोयर ने इसका जवाब दिया। उन्होंने कहा, “राज्य शिक्षा आयोग को एनसीआरटी का पाठ्यक्रम बदने का अधिकार नहीं है। हालांकि, इस विषय पर परिषद ने जरूरी जानकारी एनसीआरटी को भेज दी है। हम आगे भी यह जानकारी भेजते रहेंगे।”

 

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Author: BBC LIVE

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