म्यूनिख (जर्मनी)
यूएस के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अमेरिका को यूरोप का 'चाइल्ड' यानी 'संतान' बताया है। उन्होंने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के मंच से उस इतिहास की बात की जिसे यूएस और यूरोप साझा करते हैं। दावा किया कि उनका देश यूरोप के साथ मिलकर खुशहाली का नया रास्ता तय करना चाहता है। उनके भाषण का सभागार में मौजूद विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने खड़े होकर और तालियां बजाकर स्वागत किया। बेहद सौम्य और साधारण अंदाज में उन्होंने ट्रांस-अटलांटिक युग के अंत का लक्ष्य न रखने की बात कही। रुबियो ने कहा, “ट्रांसअटलांटिक युग का अंत न तो हमारा लक्ष्य है और न ही हमारी इच्छा है। हम अमेरिकियों का घर भले ही वेस्टर्न हेमिस्फेयर में हो, लेकिन हम हमेशा यूरोप की संतान ही रहेंगे।” इसके बाद उन्होंने यूरोप-यूएस के बॉन्ड की बात की। साझा इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे यूएस की कहानी एक इतालवी एक्सप्लोरर से शुरू हुई और पहली कॉलोनियां अंग्रेजों ने बनाईं। फिर स्कॉटिश, आयरिश और जर्मन किसानों ने उन्हें आकार दिया।
रुबियो के मुताबिक, "हमारा इतिहास और हमारी किस्मत दोनों हमेशा एक-दूसरे से जुड़े रहेंगे। अमेरिका खुशहाली की एक नई सदी के लिए रास्ता बना रहा है, लेकिन वह ऐसा यूरोप के साथ करना चाहता है। हम नहीं चाहते कि हमारे सहयोगी और साथी शर्म की जंजीरों में जकड़े हों।"
अमेरिकी विदेश मंत्री की मानें तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अगुआई में संयुक्त राज्य अमेरिका ग्लोबल “रिन्यूअल और रेस्टोरेशन” को लीड करना चाहता है। उन्होंने म्यूकहा कि यूनाइटेड स्टेट्स “एक ऐसे भविष्य के विजन से आगे बढ़ेगा जो उतना ही गौरवान्वित करने वाला होगा, उतना ही स्वायत्त और जरूरी होगा जितना हमारी सभ्यता का अतीत रहा है।”
उन्होंने कहा, “और अगर जरूरत पड़ी, तो हम इसे अकेले करने के लिए तैयार हैं, लेकिन यह हमारी पसंद और उम्मीद है कि हम इसे आपके साथ, यूरोप में हमारे दोस्तों के साथ मिलकर करेंगे।”
रुबियो ने कहा, “हम चाहते हैं कि यूरोप मजबूत हो। हमारा मानना है कि यूरोप को जिंदा रहना चाहिए।”
रुबियो ने डीइंडस्ट्रियलाइजेशन (उद्योग धंधों को बंद करना) और बड़े पैमाने पर माइग्रेशन को यूरोप के लिए खतरनाक बताया। उनके मुताबिक डीइंडस्ट्रियलाइजेशन "आवश्यक नहीं था," और यह युद्ध के बाद के "भ्रम" का एक "बेवकूफी भरा" नतीजा था।
उन्होंने माइग्रेशन को हल्के में न लेने की सलाह भी दी। बोले, “बड़े पैमाने पर माइग्रेशन कोई मामूली चिंता नहीं है, था भी नहीं,” क्योंकि वह चेतावनी देते हैं कि यह “पूरे पश्चिम में समाजों को बदल रहा है और अस्थिर कर रहा है। यह हमारे समाज के ताने-बाने और हमारी सभ्यता के बने रहने के लिए एक बड़ा खतरा है।”
म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन हर साल फरवरी में जर्मनी के म्यूनिख शहर में आयोजित किया जाता है। इसमें दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष, रक्षा मंत्री और सैन्य विशेषज्ञ जुटते हैं और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों, युद्ध और कूटनीति पर खुलकर चर्चा करते हैं।
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