अब्दुल सलाम कादरी। अनूपपुर/डोला। डोला क्षेत्र में ट्रक मालिकों, लिफ्टरों, प्रशासनिक अधिकारियों एवं क्षेत्रीय नेताओं के बीच हुए कथित समझौते को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। समझौते को कई माह बीत जाने के बावजूद इसकी प्रति आज तक सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे ट्रक मालिकों और स्थानीय लोगों में आक्रोश है।
शिकायतकर्ता रामपाल तिवारी ने इस मामले को लेकर व्हाट्सऐप ग्रुप के माध्यम से तथा लिखित रूप में कई बार संबंधित अधिकारियों को शिकायत भेजी है। इसके अलावा स्थानीय समाचार पत्रों में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया, लेकिन इसके बावजूद अब तक समझौते की प्रति सार्वजनिक नहीं की गई है।
बताया गया है कि इस शिकायत की एक प्रति क्षेत्रीय विधायक दिलीप जायसवाल को भी प्रेषित की गई थी, ताकि मामले में उच्च स्तर पर संज्ञान लिया जा सके। हालांकि अब तक इस दिशा में भी कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है।
ट्रक मालिकों का आरोप है कि विष्णु शर्मा एवं उनके कर्मचारियों द्वारा खुलेआम दबाव और धमकी दी जा रही है। उनका कहना है कि गाड़ियां मनमाने रेट पर लगवाई जाती हैं और तय दरों का पालन नहीं किया जाता। विरोध करने पर डराने-धमकाने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
मामले की गंभीरता इस बात से भी स्पष्ट होती है कि जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों एवं एसडीएम प्रतिनिधि के समक्ष मुद्दा उठाए जाने के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है। इससे प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
शिकायतकर्ता द्वारा पुलिस अधीक्षक, थाना विजुरी एवं थाना रामनगर सहित विभिन्न स्तरों पर लिखित शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन अब तक किसी प्रकार की निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई है।
ट्रक यूनियनों का यह भी आरोप है कि लिफ्टरों द्वारा प्रति लोडिंग 4000 से 5000 रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। आरोप है कि समझौते के समय इस मुद्दे को नजरअंदाज कर दिया गया। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि इसी वसूली के माध्यम से कोलरी अधिकारियों को प्रभावित कर “ROM” कोयले की जगह उच्च गुणवत्ता वाले स्टीम कोयले की लोडिंग कराई जा रही है।
मुख्य मांगें:
- समझौते की प्रति तत्काल सार्वजनिक की जाए
- अवैध वसूली पर रोक लगाई जाए
- पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए
- ट्रक मालिकों को सुरक्षा एवं निर्धारित दर सुनिश्चित किया जाए
अब देखना होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या ट्रक मालिकों को न्याय मिल पाता है या नहीं।






















