विशेष खोजी रिपोर्ट-अब्दुल सलाम क़ादरी
हसदेव एरिया में सिविल विभाग के अंतर्गत जारी करोड़ों रुपये के रिपेयरिंग कार्यों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। लगभग 1.85 करोड़ रुपये के बिजुरी रिपेयर कार्य एवं 1.50 करोड़ रुपये के जेकेडी में रिपेयर कार्य की निविदा प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कई ठेकेदारों ने जांच की मांग की है। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में अपनाई गई कार्यप्रणाली से कुछ प्रतिभागियों को नुकसान पहुंचा जबकि कुछ को लाभ मिला।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि दोनों कार्यों में निविदा प्रक्रिया के दौरान ऐसे निर्णय लिए गए, जिनसे प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई। उनका कहना है कि सामान्यतः जिन मामलों में दस्तावेजों की कमी या तकनीकी त्रुटियां होती हैं, वहां विभाग द्वारा “शॉर्टफॉल” प्रक्रिया के माध्यम से संबंधित ठेकेदारों को आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाता है। लेकिन इन दोनों टेंडरों में कथित रूप से यह प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।
आरोप लगाने वाले पक्ष का कहना है कि यदि शॉर्टफॉल की प्रक्रिया लागू की जाती तो कई अन्य प्रतिभागियों को भी अवसर मिल सकता था। उनका दावा है कि हसदेव क्षेत्र के अधिकांश टेंडरों में शॉर्टफॉल की प्रक्रिया अपनाई जाती रही है, लेकिन करोड़ों रुपये के इन दोनों कार्यों में ऐसा नहीं किया गया, जिससे संदेह की स्थिति उत्पन्न हुई है।
जेकेडी और बिजुरी के टेंडरों पर सवाल
सूत्रों के अनुसार लगभग 1.50 करोड़ रुपये के जेकेडी रिपेयर कार्य तथा 1.85 करोड़ रुपये के बिजुरी रिपेयर कार्य में कई ठेकेदारों ने भाग लिया था। आरोप है कि कुछ प्रतिभागियों ने प्रतिस्पर्धी दरों पर बोली लगाई थी, लेकिन अंतिम निर्णय में उन्हें अपेक्षित अवसर नहीं मिला।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि निविदा प्रक्रिया से जुड़े सभी तकनीकी एवं वित्तीय दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि चयन किन मानकों पर किया गया। उनका आरोप है कि यदि पूरी फाइल सार्वजनिक हो जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
विभाग और ठेकेदार की कथित मिलीभगत के आरोप
कुछ ठेकेदारों ने आरोप लगाया है कि शॉर्टफॉल प्रक्रिया नहीं अपनाने के पीछे विभाग और संबंधित पक्षों की कथित मिलीभगत हो सकती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होने पर वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
उनका दावा है कि जिन मामलों में सामान्य रूप से शॉर्टफॉल मांगा जाता है, वहां इस बार ऐसा नहीं किया गया। इसके कारण कुछ प्रतिभागियों को तकनीकी आधार पर बाहर होना पड़ा और अंतिम प्रतिस्पर्धा सीमित हो गई।
एबव (Above) रेट पर स्वीकृति को लेकर भी सवाल
मामले में यह आरोप भी सामने आ रहे हैं कि लगभग 2 करोड़ रुपये से अधिक के कार्यों में 4 से 5 प्रतिशत एबव रेट पर स्वीकृति दी गई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब अन्य योग्य प्रतिभागी मौजूद थे, तो एबव रेट पर कार्य स्वीकृत करने के कारणों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
चहेते ठेकेदार पर विभाग की मेहरबानी?
आरोप लगाने वाले पक्ष का कहना है कि यदि पूरी वित्तीय मूल्यांकन रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी जाए तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि विभाग ने किस आधार पर निर्णय लिया।
टेंडर रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि निविदा में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों के तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन की जानकारी सार्वजनिक की जाए। साथ ही यह भी मांग उठ रही है कि जिन प्रतिभागियों के दस्तावेजों पर आपत्ति दर्ज की गई थी, उनसे संबंधित पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए।
उनका कहना है कि यदि प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप हुई है तो विभाग को सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
सीबीआई और विजिलेंस को शिकायत भेजने की तैयारी
मामले को लेकर असंतुष्ट पक्ष अब उच्च स्तर पर शिकायत भेजने की तैयारी में जुट गया है। सूत्रों के अनुसार निविदा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, शॉर्टफॉल प्रक्रिया नहीं अपनाने तथा कार्य आवंटन में पारदर्शिता के अभाव को लेकर विजिलेंस, सीवीसी तथा अन्य सक्षम जांच एजेंसियों को शिकायत भेजने की तैयारी चल रही है।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि शिकायत के साथ निविदा से जुड़े दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड भी संलग्न किए जाएंगे। उनका कहना है कि स्वतंत्र जांच एजेंसी द्वारा मामले की जांच होने पर पूरी सच्चाई सामने आ सकती है।
उठ रहे हैं बड़े सवाल
– जेकेडी और बिजुरी के करोड़ों रुपये के कार्यों में शॉर्टफॉल प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई?
– क्या सभी प्रतिभागियों को समान अवसर दिया गया?
– एबव रेट पर कार्य स्वीकृत करने के पीछे क्या कारण थे?
– तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन किन मानकों पर किया गया?
– क्या विभाग पूरी निविदा प्रक्रिया और मूल्यांकन रिपोर्ट सार्वजनिक करेगा?
– क्या मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाएगी?
– क्या शिकायतों के बाद विजिलेंस या अन्य एजेंसियां मामले का संज्ञान लेंगी?
हसदेव क्षेत्र में इन टेंडरों को लेकर चर्चा लगातार तेज हो रही है। अब सभी की निगाहें विभागीय अधिकारियों के जवाब और संभावित जांच पर टिकी हैं। यदि शिकायतें औपचारिक रूप से दर्ज होती हैं और जांच शुरू होती है, तो करोड़ों रुपये के इन कार्यों से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
इसी कड़ी में अगला अपडेट जल्द आपके सामने….
वही हसदेव के अधिकारियों का कहना है कि हम किसी से नही डरते ना सीबीआई से ना विजिलेंस से ? कमिशन सबको बराबर दिया जाता है तो जांच कौन करेगा ? मोदी जी ने कहा है कि सबका साथ सबका विकास😂?





















