September 10, 2026 5:26 pm

सिंहस्थ 2028 की तैयारी में बड़ा फैसला, उज्जैन की पुरानी मस्जिद हटाने पर हाईकोर्ट ने राहत से किया इनकार

 इंदौर 

उज्जैन में सिंहस्थ महापर्व 2028 की तैयारियों के तहत सड़कों के चौड़ीकरण का काम तेजी से चल रहा है। कंठाल से बड़े गोपाल मंदिर मार्ग के चौड़ीकरण की जद में आ रही करीब 100 साल पुरानी शाही मस्जिद को हटाने के खिलाफ दायर दोनों याचिकाओं को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने बुधवार को खारिज कर दिया। जस्टिस संदीप एन. भट्ट की एकल पीठ ने दोनों मामलों की एक साथ सुनवाई की और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिकाएं निरस्त कर दीं।
 उज्जैन की 100 साल पुरानी शाही मस्जिद के तोड़ने पर फिलहाल कोई रोक नहीं है। सिंहस्थ 2028 के तहत किए जा रहे सड़क चौड़ीकरण के दायरे में यह मस्जिद भी आ रही है।उज्जैन नगर निगम ने इसे हटाने के लिए नोटिस दिया था जिसे चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका प्रस्तुत हुई थी। बुधवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने निगम की कार्रवाई पर किसी तरह की रोक लगाने से इंकार करते हुए याचिका निराकृत कर दी।

हाई कोर्ट में प्रस्तुत इन याचिकाओं में मप्र शासन, ज्वाइंट डायरेक्टर टीएंडसीपी, उज्जैन नगर निगम, भवन अधिकारी और कलेक्टर उज्जैन को पक्षकार बनाया गया था। उप महाधिवक्ता सुदीप भार्गव ने याचिका निरस्त करने और कार्रवाई पर किसी तरह का स्टे नहीं दिए जाने की पुष्टि की है।

मस्जिद पक्ष की ओर से प्रस्तुत याचिका में नगर निगम के भवन अधिकारी द्वारा जारी सूचना पत्र को अपूर्ण, अस्पष्ट और अवैधानिक बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई गई थी। कहा था कि शाही मस्जिद 100 वर्ष से अधिक पुरानी और मुगलकालीन मस्जिद है।

क्या है वजह

प्रशासन के अनुसार, सिंहस्थ 2028 में उज्जैन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। गोपाल मंदिर मार्ग शहर के व्यस्त और संकरे रास्तों में शामिल है। याचिकाकर्ताओं की ओर से मस्जिद को 100 वर्ष से अधिक पुराना और ऐतिहासिक बताया गया। पंचायत ने पुराने दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि 17 मार्च 1925 को सिंधिया राजघराने के चेयरमैन, टाउन इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट और ग्वालियर सरकार लश्कर की ओर से शहर काजी को पत्र जारी किया गया था। इसमें कुछ भूमि के अधिग्रहण के बाद मस्जिद के शेष हिस्से को यथावत रखने का उल्लेख होने का दावा किया गया है।

पहली याचिका शाही मस्जिद वक्फ पंचायत मोचियान के प्रतिनिधि अशफाक अहमद और शाही मस्जिद इंतजामिया कमेटी वक्फ पंच मोचियान के प्रतिनिधि और वाइस चेयरमैन अशफाक अहमद की ओर से दायर की गई थी। इसमें मप्र शासन, ज्वाइंट डायरेक्टर टीएंडसीपी, उज्जैन नगर निगम, बिल्डिंग ऑफिसर और कलेक्टर उज्जैन को पक्षकार बनाया गया था।

दूसरी याचिका शाही मस्जिद वक्फ पंच मोचियान के प्रेसीडेंट अशान हुसैन की अपर से लगाई गई थी। इसमें मप्र दूसरी याचिका शाही मस्जिद वक्फ पंच मोचियान के प्रेसीडेंट अरशान हुसैन की ओर से लगाई गई थी। इसमें मप्र शासन, उज्जैन नगर निगम और मप्र वक्फ बोर्ड को पक्षकार बनाया गया था।

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता सैय्यद अशहर अली वारसी ने कहा कि अभी विस्तृत लिखित आदेश आना बाकी है। याचिकाएं खारिज की गई हैं, लेकिन आदेश का अध्ययन करने के बाद फैसले के खिलाफ डबल बेंच या सुप्रीम कोर्ट में अपील की जाएगी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मस्जिद ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की है, इसलिए इसे हटाया नहीं जाना चाहिए।मस्जिद प्रबंधन ने पुराने दस्तावेजों का हवाला दिया था।

प्रशासन के अनुसार, सिंहस्थ 2028 में उज्जैन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। गोपाल मंदिर मार्ग शहर के व्यस्त और संकरे रास्तों में शामिल है। सिंहस्थ के दौरान यातायात को सुचारू रखने और भीड़ का दबाव कम करने के लिए इस मार्ग का चौड़ीकरण जरूरी माना जा रहा है। नगर निगम का कहना है कि कार्रवाई मास्टर प्लान और निर्धारित नियमों के तहत की जा रही है।

अनवर कादरी की पार्षदी खत्म करने का मामला पहुंचा हाई कोर्ट, दायर हुई याचिका

इंदौर :नगर निगम वार्ड 58 से पार्षद रहे अनवर कादरी की पार्षदी समाप्त करने के मामले में हाई कोर्ट में याचिका दायर हुई है। याचिका कादरी की पत्नी ने दायर की है।याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति संदीप एन भट्ट ने शासन से कहा कि वह दो दिन में स्पष्ट करे कि कादरी की ओर से की गई अपील की क्या स्थिति है। एडवोकेट विभोर खंडेलवाल के मुताबिक कादरी की पार्षदी खत्म करने के संभागायुक्त के निर्णय को प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन के समक्ष चुनौती देते हुए अपील दायर की गई थी जो अब भी लंबित है।

अपील लंबित रहने के दौरान प्रमुख सचिव ने निर्वाचन आयोग से चुनाव के लिए अनुशंसा कर दी। इसी को चुनौती देते हुए याचिका प्रस्तुत हुई है। बुधवार को हुई सुनवाई में शासन कोर्ट को बताया कि फिलहाल वार्ड में चुनाव स्थगित कर दिए हैं।

इस पर कादरी के वकील ने सवाल उठाया कि अपील लंबित है तो फिर ऐसी स्थिति में चुनाव कराए कैसे जा सकते हैं। इस पर कोर्ट ने अपील की स्थिति के बारे में पूछा जिस पर सरकारी वकील ने जानकारी लेने की बात कही। इस पर कोर्ट ने शासन को दो दिन का समय दिया है। शासन को बताना है कि कादरी की ओर से दायर अपील की क्या स्थिति है। मामले में अब 11 सितंबर को सुनवाई होगी।

शाही मस्जिद 100 वर्ष पुरानी, ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध
याचिकाओं में मस्जिद कमेटी ने उज्जैन नगर निगम के नोटिस को अपूर्ण, अस्पष्ट और अवैधानिक बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई थी। प्रबंधन का दावा है कि शाही मस्जिद 100 वर्ष से अधिक पुरानी है और इससे जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध हैं। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, 17 मार्च 1925 को सिंधिया राजघराने के चेयरमैन, टाउन इम्पूवमेंट ट्रस्ट और ग्वालियर सरकार लश्कर की ओर से शहर काजी को पत्र जारी किया गया था। इसमें भूमि अधिग्रहण के बाद मस्जिद के शेष हिस्से को यथावत रखने का उल्लेख था। इसके अलावा 13 सितंबर 1985 के मप्र शासन के राजपत्र में भी मस्जिद और उसकी पैमाइश का उल्लेख होने का दावा किया गया है।

वर्तमान में सड़क करीब 40 फीट चौड़ी
प्रबंधन का यह भी कहना है कि वर्ष 1975 में यातायात सुगम बनाने के लिए मस्जिद की ओर से स्वेच्छा से भूमि दी गई थी। वर्तमान में सड़क करीब 40 फीट चौड़ी है और आवागमन में कोई बड़ी बाधा नहीं है। इसलिए धार्मिक स्थल को हटाने की कार्रवाई को गलत बताया था। हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं ओर सरकार का पक्ष सुनने के बाद याचिकाओं को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता सैय्यद अश्हार अली वारसी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि हम विस्तृत आदेश का इंतजार कर रहे हैं। कोर्ट के आदेश को देखने के बाद उसके खिलाफ हम अपील दायर करेंगे।

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Author: Editor

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