August 25, 2026 12:28 pm

भीड़ बनी जल्लाद! बांग्लादेश में एक महीने में 21 मौतें, सैकड़ों महिलाओं और बच्चों पर अत्याचार

ढाका
बांग्लादेश में जनवरी महीने के दौरान भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या और जेल हिरासत में मौतों की घटनाओं में खतरनाक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मानवाधिकार संगठन मानबाधिकार शोंग्स्कृति फाउंडेशन (MSF) की मासिक रिपोर्ट ने देश की कानून-व्यवस्था और मानवाधिकार हालात को “खतरनाक और जटिल” करार दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी में भीड़ हिंसा में कम से कम 21 लोगों की मौत हुई, जबकि दिसंबर 2025 में यह संख्या 10 थी। एमएसएफ ने कहा कि भीड़ हिंसा पर राज्य की ओर से ठोस और सख्त कार्रवाई न होने से दंडहीनता की संस्कृति को बढ़ावा मिला है, जिससे आम जनता का न्याय व्यवस्था पर भरोसा कमजोर हुआ है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अज्ञात शवों की बरामदगी में इजाफा हुआ है।

जनवरी में 57 अज्ञात शव मिले, जबकि दिसंबर में यह संख्या 48 थी।जेल हिरासत में मौतें भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं। जनवरी में 15 कैदियों की जेल में मौत हुई, जबकि दिसंबर में यह आंकड़ा 9 था। इसके अलावा, कानून प्रवर्तन एजेंसियों की हिरासत में दो लोगों की मौत की भी रिपोर्ट सामने आई। एमएसएफ ने इन मौतों के लिए चिकित्सकीय लापरवाही, अमानवीय हालात और जेल प्रशासन की खामियों को जिम्मेदार ठहराया। आगामी 13वें राष्ट्रीय चुनाव से पहले राजनीतिक हिंसा में भी तेजी देखी गई। जनवरी में चुनावी झड़पों में चार लोगों की मौत और 509 लोग घायल हुए, जबकि दिसंबर में सिर्फ एक मौत दर्ज की गई थी।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि राजनीतिक मामलों में अज्ञात व्यक्तियों को आरोपी बनाए जाने की प्रवृत्ति खतरनाक रूप से बढ़ी है। दिसंबर में जहां 110 अज्ञात आरोपी दर्ज किए गए थे, वहीं जनवरी में यह संख्या बढ़कर 320 हो गई। इसके साथ ही महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा की स्थिति भी बेहद चिंताजनक रही। जनवरी में 257 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 34 बलात्कार और 11 सामूहिक बलात्कार के मामले शामिल हैं। अल्पसंख्यक समुदायों पर हमले भी बढ़े हैं। मंदिरों और मूर्तियों में चोरी, तोड़फोड़ और नुकसान की 21 घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि दिसंबर में यह संख्या सिर्फ छह थी। एमएसएफ ने सरकार से सभी मानवाधिकार उल्लंघनों की तत्काल और निष्पक्ष जांच कराने तथा नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि न्याय व्यवस्था पर भरोसा बहाल हो सके।

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Author: Editor

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