July 29, 2026 2:38 am

जमीनी अनुभव ही बनेंगे प्रशिक्षण, डिजिटल नवाचार और सेवा सुधार की नई दिशा

भोपाल 

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनवाड़ी केंद्रों के सुदृढ़ीकरण एवं रूपांतरण के उद्देश्य से मंगलवार को संचालनालय, महिला एवं बाल विकास, भोपाल में राज्य स्तरीय विचार-मंथन (ब्रेनस्टॉर्मिंग) कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में प्रदेश के सभी संभागों से चयनित सक्रिय, नवाचारी एवं कार्य के प्रति समर्पित आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। महिला एवं बाल विकास विभाग की आयुक्त सुश्री निधि निवेदिता ने कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद कर उनके अनुभव, सुझाव, नवाचार और जमीनी चुनौतियों को विस्तार से सुना।

आयुक्त सुश्री निधि निवेदिता ने कहा कि इस कार्यशाला में शामिल लगभग 90 प्रतिशत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता उच्च शिक्षित हैं। मध्यप्रदेश की आंगनवाड़ी व्यवस्था अब नई ऊर्जा, आधुनिक सोच और दक्ष मानव संसाधन के साथ बदलाव के दौर में प्रवेश कर चुकी है। इस कार्यशाला से उच्च शिक्षित कार्यकर्ताओं की भागीदारी से विभाग को जमीनी स्तर पर गुणवत्तापूर्ण सुझाव प्राप्त किये जायेंगे, जो भविष्य की नीतियों और सुधारों का आधार बनेंगे। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता केवल योजनाओं का क्रियान्वयन करने वाली कर्मी नहीं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास, मातृ स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक जागरूकता की सबसे सशक्त कड़ी हैं। आयुक्त सुश्री निधि निवेदिता ने कहा कि विकसित बचपन ही विकसित मध्यप्रदेश की नींव है और इस लक्ष्य की सबसे महत्वपूर्ण भागीदार आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं। विभाग की प्रत्येक नई पहल, प्रशिक्षण व्यवस्था और तकनीकी सुधार उनके अनुभवों एवं सुझावों को केंद्र में रखकर तैयार किए जाएंगे।

आयुक्त सुश्री निधि निवेदिता ने कहा कि राज्यस्तरीय विचार-मंथन का उद्देश्य केवल चर्चा करना नहीं, बल्कि मैदानी स्तर पर कार्य कर रही आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की क्षमताओं चुनौतियों प्रशिक्षण आवश्यकताओं, स्थानीय नवाचारों तथा सेवा प्रदायगी में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को संवेदनशीलता से समझना है। इन्हीं अनुभवों के आधार पर विभाग भविष्य के क्षमता निर्माण कार्यक्रम, प्रशिक्षण मॉड्यूल, डिजिटल संसाधनों और सेवा प्रदायगी प्रणाली को और अधिक प्रभावी एवं व्यवहारिक बनाएगा।

संवाद के दौरान कार्यकर्ताओं ने पोषण पुनर्वास, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा समुदाय की सहभागिता, डिजिटल तकनीकों के उपयोग, बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने, स्थानीय नवाचारों तथा कुपोषण उन्मूलन से जुड़े अनेक सफल प्रयोग साझा किए। कई कार्यकर्ताओं ने ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक चुनौतियों और उनके समाधान के व्यावहारिक सुझाव भी दिये। आयुक्त ने नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में विकसित उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों का संकलन कर उन्हें पूरे राज्य में मॉडल के रूप में लागू किया जाएगा।

आयुक्त सुश्री निधि निवेदिता ने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र को ऐसा बाल-अनुकूल, स्वच्छ, सुरक्षित, सीखने योग्य और समुदाय-केंद्रित केंद्र बनाया जाए, जहाँ बच्चों को गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा, बेहतर पोषण और समग्र विकास का अनुकूल वातावरण उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि विभाग का लक्ष्य आंगनवाड़ी केंद्रों को केवल सेवा वितरण इकाई नहीं, बल्कि परिवारों और समुदाय के विश्वास का सशक्त केंद्र बनाना है।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने साझा किये अपने अनुभव

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती शर्मीला ठाकुर ने बताया कि देवास जिले में नगर पालिका के सभापति ने आंगनवाड़ीयों को एडॉप्ट किया, बच्चों को यूनिफार्म दी, किशोरियों में कौशल विकास का प्रशिक्षण कार्य भी कराया।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती शोभा ठाते ने केंद्र में सहजन के पेड़ लगाये, जो पोषण में काम आ रहे हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता उनकी फलियों के बदले में समुदाय से पोषण वाटिका के लिये बीज इत्यादि प्राप्त कर रही है।

मुरैना के नावली 194 आंगनवाड़ी केंद्र पर स्थानीय स्व-सहायता समूहों से बच्चों को यूनिफार्म, जूते, टेबल कुर्सी आदि प्राप्त हुए, रोज केंद्र पर लगभग 30-35 बच्चों की उपस्थित होती है। 

Editor
Author: Editor

विज्ञापन