September 5, 2026 10:48 am

गंदे टॉयलेट की फोटो भेजिए, FASTag में आएंगे ₹1000; NHAI ने बताया पूरा तरीका

नई दिल्ली

हाईवे पर सफर करते हुए बहुत से लोगों की शिकायत टॉयलेट से जुड़ी हुई होती है. सरकार ने हाईवे और एक्सप्रेसवे पर कई पब्लिक टॉयलेट बनवाए हैं. लेकिन लोगों की शिकायत वहां सफाई को लेकर होती है. उचित साफ-सफाई ना होने की वजह से लोग हाईवे और एक्सप्रेसवे पर बने इन टॉयलेट का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं। 

लोगों को होने वाली इस असुविधा को लेकर एनएचएआई (NHAI) ने एक प्लान तैयार किया है. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने एक स्कीम का ऐलान किया है, जिसके तहत गंदे टॉयलेट की जानकारी देने पर लोगों को रिवॉर्ड मिलेगा. आइए जानते हैं क्या है नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की योजना। 

कब शुरू हुई थी ये स्कीम?
ये योजना सितंबर 2025 में लॉन्च हुए क्लिन टॉयलेट पिक्चर चैलेंज का हिस्सा है. एनएचएआई ने इस योजना को 30 जून 2027 तक के लिए बढ़ा दिया है. कई लोगों ने इस योजना का फायदा उठाया है. उन्होंने एनएचएआई को गंदे टॉयलेट की जानकारी देकर फास्टैग रिचार्ज कमाया है। 

2026 में अब तक 429 कम्यूटर्स ने गंदे टॉयलेट की जानकारी देकर 1000 रुपये का फास्टैग रिचार्ज हासिल किया है. इस स्कीम का फायदा नेशनल हाईवे पर चलने वाले सभी कम्यूटर्स उठा सकते हैं. उन्हें इसमें हिस्सा लेने के लिए साफ तस्वीर अपलोड करनी होगी. राजमार्गयात्रा मोबाइल ऐप पर जियो-टैगिंग और टाइम-स्टैम्प के साथ फोटो को अपलोड करना होगा। 

देनी होगी ये जानकारियां
इसके अलावा यूजर्स को अपनी बेसिक जानकारी भी देनी होगी. इसके तहत उन्हें अपना नाम, लोकेशन, व्हीकल रजिस्ट्रेशन नंबर और मोबाइल नंबर की जानकारी फोटो सबमिट करते हुए देनी होगी. फोटो और डेटा को एनालाइज करने के बाद सभी वैध व्हीकल रजिस्ट्रेशन नंबर से मिली ऐसी जानकारी के लिए उन्हें इंस्टैंट 1000 रुपये का रिवॉर्ड मिलेगा। 

ये रिवॉर्ड फास्टैग रिचार्ज के रूप में मिलेगा, जो लिंक व्हीकल रजिस्ट्रेशन नंबर वाले अकाउंट में क्रेडिट होगा. पूरे स्कीम के दौरान एक गाड़ी को सिर्फ एक बार ही रिवॉर्ड मिलेगा. ये रिवॉर्ड नॉन-ट्रांसफरेबल होगा और इसे कैश में क्लेम नहीं किया जा सकेगा।  

ऐसे मामले में जहां एक ही फैसिलिटी के लिए कई शिकायतें की गई हो. वहां पर जिसने सबसे पहले शिकायत की होगी, उसे इसका फायदा मिलेगा. ये स्कीम सिर्फ एनएचएआई के तहत आने वाले टॉयलेट फैसिलिटी पर लागू होती है. एनएचएआई ने 
इसके बारे में सोशल मीडिया पर जानकारी दी है। 

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Author: Editor

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