नई दिल्ली
संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि वो अमेरिकी हितों को सर्वोपरि रखते हुए जलवायु परिवर्तन को लेकर बनाए संगठन समेत विश्व कल्याण के लिए बनी 66 एजेंसियों से अपने हाथ खींच लेंगे। मतलब दुनिया का सबसे विकसित देश इसमें कोई भी योगदान नहीं देगा। द गार्डियन के मुताबिक इसमें 35 गैर-संयुक्त राष्ट्र (नॉन-यूएन) संगठन और 31 संयुक्त राष्ट्र की संस्थाएं शामिल हैं। व्हाइट हाउस और विदेश विभाग के अनुसार ये संगठन अमेरिकी हितों के खिलाफ हैं। इनमें पैसों की बर्बादी होती है। इसके अलावा, इन्हें चलाने का तरीका सही नहीं है; ये बेहद खराब हैं। इस कदम को ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति का हिस्सा बताया जा रहा है।
ट्रंप के फैसले के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने बयान जारी किया कि ये समझौते अमेरिका की प्रगति के आड़े आते हैं। यह अर्थव्यवस्थाओं और लोगों की जिंदगियों पर असर डाल रहे हैं। रूबियो ने कहा कि इन संगठनों से अलग होने का कदम राष्ट्रपति ट्रंप के अमेरिकियों से किए गए वादे को पूरा करता है। हम उन नौकरशाहों को आर्थिक सहायता देना बंद कर देंगे जो हमारे हितों के खिलाफ काम करते हैं। ट्रंप प्रशासन हमेशा अमेरिका और अमेरिकियों को ऊपर रखेगा।
जिन संगठनों से अमेरिका ने किनारा किया है उनमें भारत की पहल से बना संगठन इंटरनेशनल सोलर अलायंस (आईएसए) भी शामिल है। इसे 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन फ्रेंच राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने पेरिस जलवायु सम्मेलन में शुरू किया था।
वहीं, अमेरिका 'संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज' (यूएनएफसीसीसी) से बाहर होगा। द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक यूएनएफसीसीसी 1992 का समझौता है, जो दुनिया के लगभग सभी देशों को जोड़ता है और जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मदद करता है। 34 साल पहले इसकी शुरुआत के बाद से दुनिया के हर देश ने इस पर सहमति जताई। अमेरिकी सीनेट ने अक्टूबर 1992 में इस समझौते को मंजूरी दी थी।
यह पेरिस जलवायु समझौते के लिए भी अहम है, जिससे ट्रंप पहले ही अमेरिका को बाहर करने की बात कह चुके हैं। ट्रंप ने नवंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भी नहीं भेजा था। यह ब्राजील में आयोजित हुआ था। इसके अलावा, इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) जैसी महत्वपूर्ण जलवायु संस्थाओं से भी अमेरिका अलग हो रहा है। ट्रंप ने नियमित तौर पर क्लाइमेट साइंस का मजाक उड़ाया है। इसे “घोटाला” और “फर्जी” तक कहते रहे हैं।
ट्रंप ने जनवरी 2025 में ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से बाहर निकलने की घोषणा कर दी थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन की सदस्यता से बाहर निकलने के लिए एक साल का नोटिस आवश्यक होता है। 22 जनवरी 2026 के बाद अमेरिका इसका सदस्य नहीं रहेगा।
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अमेरिका का बड़ा फैसला: 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से दूरी, ट्रंप की ‘अमेरिका-फर्स्ट’ सोच फिर चर्चा में
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