रिपोर्ट | अब्दुल सलाम क़ादरी
खोंगापानी/एमसीबी।
छत्तीसगढ़ के एमसीबी जिले अंतर्गत नगर पंचायत खोंगापानी में इन दिनों पानी का गंभीर संकट गहराता जा रहा है। विडंबना यह है कि जिस क्षेत्र की जनता खुद पीने के पानी के लिए परेशान है, उसी क्षेत्र से एसईसीएल द्वारा लाखों लीटर पानी मध्यप्रदेश भेजे जाने का आरोप सामने आया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एसईसीएल हसदेव एरिया के झगराखण्ड सब एरिया से पानी निकालकर बिना नगर पंचायत की अनुमति, बिना किसी लिखित समझौते और बिना वन विभाग की स्वीकृति के जंगलों के रास्ते मोटी पाइप लाइन बिछाकर मध्यप्रदेश स्थित राजनगर क्षेत्र तक पानी सप्लाई किया जा रहा है।

स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों में इस पूरे मामले को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का आरोप है कि खोंगापानी नगर पंचायत क्षेत्र में कई मोहल्लों में पानी की नियमित सप्लाई नहीं हो पा रही, महिलाएं दूर-दूर तक पानी भरने को मजबूर हैं, लेकिन एसईसीएल को स्थानीय जनता की तकलीफों से कोई लेना-देना नहीं है। कंपनी छत्तीसगढ़ के संसाधनों का दोहन कर दूसरे राज्य को लाभ पहुंचाने में लगी हुई है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किसकी अनुमति से यह पाइप लाइन जंगलों के भीतर से डाली गई? यदि वन भूमि का उपयोग किया गया है तो क्या वन विभाग से वैधानिक अनुमति ली गई? यदि नहीं, तो यह सीधा-सीधा नियमों और पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन माना जाएगा। वहीं नगर पंचायत खोंगापानी से भी कथित तौर पर किसी प्रकार का लिखित अनुबंध या एनओसी नहीं लिया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब खोंगापानी की जनता पानी के लिए त्राहिमाम कर रही है, तब छत्तीसगढ़ का पानी मध्यप्रदेश भेजना राज्य के अधिकारों और स्थानीय जरूरतों के साथ अन्याय है। लोगों ने मांग की है कि मध्यप्रदेश को जा रही पानी सप्लाई तत्काल प्रभाव से रोकी जाए और एसईसीएल अपने मध्यप्रदेश स्थित राजनगर माइंस से वहां के लोगों के लिए अलग जल व्यवस्था करे।
क्षेत्र में चर्चा है कि एसईसीएल प्रबंधन स्थानीय समस्याओं को नजरअंदाज कर अपनी मनमानी पर उतारू है। जनता पूछ रही है कि क्या छत्तीसगढ़ केवल संसाधन देने के लिए है और बदले में यहां की जनता को सिर्फ संकट और उपेक्षा मिलेगी?
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन, नगर पंचायत और वन विभाग इस गंभीर मामले में क्या कार्रवाई करते हैं, या फिर हमेशा की तरह बड़े सरकारी उपक्रम के दबाव में पूरा मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।






















