May 26, 2026 2:45 pm

कुर्सी बचाने OSD की बलि? जांच से पहले कार्रवाई पर घिरी मंत्री!” “जांच अधूरी, कार्रवाई पूरी! आखिर किसे बचा रही हैं मंत्री?”

रायपुर | विशेष रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ की राजनीति इन दिनों एक ऐसे प्रशासनिक विवाद को लेकर गरमा गई है, जिसने सत्ता के भीतर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़ा है, जहां एक संवेदनशील विवाद के बीच मंत्री द्वारा अपने ही OSD (विशेष कार्य अधिकारी) पर अचानक कार्रवाई किए जाने से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस मामले को लेकर यह कार्रवाई की गई, उसकी आधिकारिक जांच अब तक पूरी नहीं हुई है। न जांच एजेंसी ने अंतिम रिपोर्ट सौंपी है और न ही किसी स्तर पर दोष तय किया गया है। इसके बावजूद OSD पर कार्रवाई किए जाने से यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह कदम प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के लिए उठाया गया, या फिर बढ़ते राजनीतिक दबाव से बचने की एक रणनीति थी?

सूत्रों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों से विभाग से जुड़ा एक विवाद सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा था। विपक्ष लगातार मंत्री पर निशाना साध रहा था और पूरे मामले में जवाब मांग रहा था। मीडिया और सोशल मीडिया में भी चर्चाओं का दौर तेज था। इसी बीच अचानक मंत्री कार्यालय की ओर से OSD को हटाने अथवा उसके खिलाफ कार्रवाई की खबर सामने आई, जिसके बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोर पकड़ने लगी कि मंत्री ने खुद पर उठ रहे सवालों का दबाव कम करने के लिए अपने करीबी अधिकारी को ही जिम्मेदार ठहरा दिया।

अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब जांच रिपोर्ट अभी आई ही नहीं, तब यह कैसे तय हो गया कि गलती OSD की थी? यदि जांच पूरी होने से पहले ही किसी अधिकारी को दोषी मान लिया जाएगा, तो फिर जांच प्रक्रिया का महत्व क्या रह जाएगा? प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्यतः किसी भी मामले में पहले तथ्यों की पुष्टि होती है, फिर जवाबदेही तय की जाती है और उसके बाद कार्रवाई की जाती है। लेकिन इस मामले में पूरी प्रक्रिया उलटी नजर आ रही है।

राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि पर्दे के पीछे से फैसले कोई और ही संचालित कर रहा था। पिछले दिनों कुछ समाचारों में भी इस ओर संकेत किए गए थे। इतना ही नहीं, विभाग के भीतर एक अधिकारी को कथित तौर पर अनाधिकृत तरीके से अटैच कर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दिए जाने की चर्चा भी सामने आ रही है। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि एक ऐसे अधिकारी को विभाग में लाने की तैयारी चल रही है, जिसकी विभागीय जांच पहले से लंबित है। इन चर्चाओं ने पूरे विवाद को और अधिक गंभीर बना दिया है।

विपक्ष ने इस मामले को हाथोंहाथ लेते हुए सरकार और मंत्री दोनों पर तीखा हमला बोला है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि यह “बलि का बकरा” बनाने का सीधा मामला है। उनका कहना है कि मंत्री अपनी राजनीतिक छवि और पद बचाने के लिए पूरे विवाद का ठीकरा OSD पर फोड़ना चाहती हैं। विपक्ष ने पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है ताकि वास्तविक जिम्मेदारों की पहचान हो सके।

राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो सत्ता और प्रशासन के ऐसे मामलों में अक्सर जिम्मेदारी निचले स्तर के अधिकारियों पर डाल दी जाती है, जबकि वास्तविक निर्णय उच्च स्तर पर लिए जाते हैं। उनका कहना है कि OSD किसी मंत्री का प्रशासनिक सहयोगी होता है, वह स्वतंत्र रूप से बड़े फैसले लेने की स्थिति में नहीं होता। ऐसे में किसी विवादित निर्णय की पूरी जिम्मेदारी केवल एक अधिकारी पर डालना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

इधर प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारी संगठनों में भी इस कार्रवाई को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। कई अधिकारियों का कहना है कि यदि बिना जांच पूरी हुए अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से दोषी ठहराया जाएगा, तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था का मनोबल टूटेगा। भविष्य में किसी भी राजनीतिक विवाद की स्थिति में अधिकारी स्वयं को असुरक्षित महसूस करेंगे।

हालांकि मंत्री पक्ष की ओर से सफाई भी सामने आई है। उनका कहना है कि विभागीय अनुशासन और प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं। लेकिन विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषक इस तर्क से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आ रहे।

जनता के बीच भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे जवाबदेही तय करने की कोशिश मान रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग इसे राजनीतिक बचाव की रणनीति बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी लगातार यह सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर जांच रिपोर्ट से पहले किसी अधिकारी को दोषी मान लेना कितना उचित है?

अब पूरे मामले में सबकी नजर जांच एजेंसियों की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट सामने आने के बाद कई बड़े खुलासे हो सकते हैं और यह स्पष्ट हो जाएगा कि वास्तविक जिम्मेदार कौन था। फिलहाल इतना तय है कि OSD पर हुई कार्रवाई ने सरकार और मंत्री—दोनों को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है।

BBC LIVE
Author: BBC LIVE

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