महाभारत इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा युद्ध माना जाता है, जिसमें असंख्य लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 18 दिनों तक चले इस युद्ध में हर दिन नई घटनाएं हुईं और अनेक महान योद्धा वीरगति को प्राप्त हुए. योगेश्वर श्रीकृष्ण ने हर परिस्थिति में धर्म की रक्षा की और हर दिन जय-पराजय के नए उदाहरण सामने आए.
युद्ध शुरू होने से पहले भीष्म पितामह के सुझाव पर कौरवों और पांडवों ने मिलकर कुछ नियम बनाए. जैसे युद्ध सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही होगा, समान श्रेणी के योद्धा आपस में युद्ध करेंगे, निहत्थे या शरण में आए व्यक्ति पर प्रहार नहीं किया जाएगा और एक योद्धा पर एक से अधिक योद्धा एक साथ आक्रमण नहीं करेंगे.
पहला दिन
युद्ध आरंभ से पहले अर्जुन मोह में पड़ गए थे, तब श्रीकृष्ण ने उन्हें गीता का उपदेश दिया था. युयुत्सु कौरवों का साथ छोड़कर पांडवों में शामिल हो गया था. पहले दिन पांडवों को भारी हानि हुई थी.
दूसरा दिन
भीष्म, द्रोण, अर्जुन और सात्यकि के बीच भयंकर युद्ध हुआ था. भीम ने हजारों सैनिकों का वध किया. इस दिन पांडवों को बढ़त मिली.
तीसरा दिन
भीम और घटोत्कच ने कौरव सेना को पीछे धकेला. भीष्म के प्रकोप को देखकर कृष्ण स्वयं हस्तक्षेप करने आगे बढ़े, लेकिन अर्जुन ने उन्हें रोका.
चौथा दिन
भीम ने कौरव सेना में भय फैला दिया और गज सेना का संहार किया. कौरवों को भारी नुकसान हुआ.
पांचवां दिन
भीष्म ने पांडव सेना में हाहाकार मचा दिया. सात्यकि के पुत्रों की मृत्यु हुई. दोनों पक्षों को भारी हानि हुई.
छठा दिन
मकर और क्रौंच व्यूह में युद्ध हुआ था. भीष्म ने पांचाल सेना का संहार भी किया था.
सातवां दिन
अर्जुन ने कौरव सेना को तहस-नहस किया. दुर्योधन को पराजय का सामना करना पड़ा.
आठवां दिन
भीम ने दुर्योधन के कई भाइयों का वध किया था. इरावान मारा गया था. कौरवों को अधिक क्षति हुई.
नौवां दिन
भीष्म के प्रचंड आक्रमण से पांडवों को भारी नुकसान हुआ. कृष्ण को शस्त्र उठाने की नौबत आ गई.
दसवां दिन
शिखंडी की सहायता से अर्जुन ने भीष्म पितामह को बाणों की शैय्या पर लिटा दिया था. जिसके कारण कौरवों ने अपना सबसे बड़ा योद्धा खो दिया था.
ग्यारहवां दिन
द्रोणाचार्य सेनापति बने. उन्होंने युधिष्ठिर को बंदी बनाने का प्रयास किया, लेकिन अर्जुन ने उन्हें बचा लिया.
बारहवां दिन
कौरवों की योजना फिर असफल रही. अर्जुन ने युधिष्ठिर को बचाया.
तेरहवां दिन
चक्रव्यूह रचा गया. अभिमन्यु वीरता से लड़ा, लेकिन अंततः अनेक योद्धाओं ने मिलकर उसका वध कर दिया. यह पांडवों के लिए सबसे बड़ी क्षति थी.
चौदहवां दिन
अर्जुन ने सूर्यास्त से पहले जयद्रथ का वध कर अपनी प्रतिज्ञा पूरी की थी.
पंद्रहवां दिन
अश्वत्थामा की झूठी खबर फैलाकर द्रोण को निराश किया गया और धृष्टद्युम्न ने उनका वध कर दिया.
सोलहवां दिन
कर्ण सेनापति बने. उन्होंने भीषण युद्ध किया, लेकिन घटोत्कच को मारने के लिए अपनी अमोघ शक्ति का प्रयोग करना पड़ा.
सत्रहवां दिन
अर्जुन ने कर्ण का वध किया. कौरव सेना का मनोबल पूरी तरह टूट गया.
अठारहवां दिन
अंतिम दिन अश्वत्थामा ने रात में पांडव शिविर पर हमला कर द्रौपदी के पुत्रों का वध किया. अंततः भीम ने दुर्योधन का वध किया और पांडवों को विजय प्राप्त हुई थी.






















