June 17, 2026 10:40 pm

सेवानिवृत्त IFS अधिकारियों और रेंजर्स की संपत्तियों की जांच की मांग, RTI एक्टिविस्ट अब्दुल सलाम कादरी ने राष्ट्रपति-राज्यपाल को लिखा पत्र

  • ईडी और सीबीआई से आय से अधिक संपत्ति की जांच कराने की मांग, वन विभाग में वर्षों से पदस्थ रहे अधिकारियों की संपत्तियों पर उठाए सवाल

रायपुर/अब्दुल सलाम क़ादरी

छत्तीसगढ़ के वन विभाग में वर्षों तक महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रहे कुछ सेवानिवृत्त भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारियों एवं रेंजर्स की कथित आय से अधिक संपत्तियों की जांच की मांग तेज हो गई है। आरटीआई एक्टिविस्ट अब्दुल सलाम कादरी ने इस संबंध में भारत के राष्ट्रपति एवं छत्तीसगढ़ के राज्यपाल को पत्र भेजकर मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की है।

अपने पत्र में कादरी ने आरोप लगाया है कि वन विभाग के कुछ अधिकारियों ने लंबे समय तक संवेदनशील पदों पर रहते हुए बड़ी मात्रा में चल एवं अचल संपत्तियां अर्जित की हैं, जिनकी वैध आय के स्रोतों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि संबंधित अधिकारियों की सेवा अवधि, वेतन, घोषित संपत्तियों और वर्तमान परिसंपत्तियों का तुलनात्मक परीक्षण कराया जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

कादरी का कहना है कि प्रदेश में अन्य विभागों के अधिकारियों के विरुद्ध समय-समय पर आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई होती रही है, लेकिन वन विभाग से जुड़े कई मामलों में अब तक व्यापक और प्रभावी जांच नहीं दिखाई दी है। इससे आम जनता के बीच संदेह की स्थिति बनी हुई है।

पत्र में राष्ट्रपति और राज्यपाल से अनुरोध किया गया है कि मामले की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इसकी जांच ईडी, सीबीआई अथवा अन्य सक्षम केंद्रीय एजेंसियों से कराई जाए। साथ ही उन अधिकारियों की संपत्तियों, बैंक खातों, निवेश, परिजनों के नाम पर अर्जित परिसंपत्तियों तथा सेवा काल के दौरान लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों की भी जांच कराई जाए।

आरटीआई एक्टिविस्ट अब्दुल सलाम कादरी ने कहा कि वन संपदा देश की राष्ट्रीय धरोहर है और इसकी सुरक्षा एवं प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों पर यदि किसी प्रकार के गंभीर आरोप लगते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होना लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनहित दोनों के लिए आवश्यक है।

मुख्य मांगें

  • सेवानिवृत्त IFS अधिकारियों और रेंजर्स की संपत्तियों का सत्यापन।
  • आय एवं संपत्ति का तुलनात्मक ऑडिट।
  • ईडी और सीबीआई से स्वतंत्र जांच।
  • परिजनों के नाम पर अर्जित संपत्तियों की जांच।
  • संवेदनशील वन क्षेत्रों में पदस्थापना और निर्णयों की समीक्षा।

वन विभाग से जुड़े इस मुद्दे पर अब राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा शुरू हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप निराधार हैं तो जांच से अधिकारियों की छवि साफ होगी, वहीं यदि अनियमितताएं सामने आती हैं तो दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त होगा।

फिलहाल सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राष्ट्रपति और राज्यपाल को भेजे गए पत्र पर संबंधित एजेंसियां क्या कदम उठाती हैं और क्या इस मामले में किसी उच्चस्तरीय जांच की शुरुआत होती है।

— खबर 30 दिन (विशेष रिपोर्ट)

BBC LIVE
Author: BBC LIVE

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