August 21, 2026 4:54 pm

हसदेव एरिया के बहेराबांध में हर महीने लाखों की कथित हेराफेरी? मामले को दबाने की कोशिश?

  • सुविधा शुल्क से लेकर कोयले की गुणवत्ता तक गंभीर सवाल, जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी पर उठे सवाल

अब्दुल सलाम कादरी। अनूपपुर। एसईसीएल हसदेव क्षेत्र के बहेराबांध रोड सेल स्टॉक यार्ड को लेकर पूर्व में प्रकाशित खबर के बाद अब मामले को कथित तौर पर दबाने और रफा-दफा करने की कोशिशों की चर्चाएं भी सामने आने लगी हैं। स्थानीय स्तर पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि मामले की गंभीरता कम करने के लिए कुछ छुटभैये पत्रकारों को कथित रूप से मैनेज किया गया है। 

इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप रोड सेल यार्ड में प्रति ट्रक 4 हजार से 4,500 रुपये तक कथित सुविधा शुल्क वसूले जाने को लेकर है। स्थानीय ट्रांसपोर्टरों और कोयला कारोबार से जुड़े लोगों का आरोप है कि कथित राशि देने वाले चुनिंदा वाहनों को बेहतर गुणवत्ता का कोयला उपलब्ध कराया जाता है, जबकि राशि नहीं देने वाले उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत निम्न गुणवत्ता का कोयला मिलने की शिकायतें हैं।

यदि यह आरोप सही है और प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहनों से हजारों रुपये की कथित वसूली होती है, तो महीने में लाखों रुपये के लेन-देन का सवाल खड़ा होना स्वाभाविक है।

बेहतर कोयले की कथित छंटाई से बढ़ा संदेह

यार्ड में बड़े आकार एवं बेहतर गुणवत्ता वाले कोयले को अलग-अलग ढेरों में रखे जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि चुनिंदा वाहनों के लिए बेहतर कोयला अलग कर लोड कराने की चर्चा है।

यदि कोयले की छंटाई तकनीकी एवं निर्धारित मानकों के तहत की जा रही है तो इसकी पूरी प्रक्रिया, अनुमति, रिकॉर्ड और गुणवत्ता परीक्षण सार्वजनिक जांच का विषय होना चाहिए। वहीं यदि किसी विशेष उपभोक्ता को लाभ पहुंचाने के लिए कोयले की छंटाई की जा रही है, तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।

R.O.M. के D.O. में भी कथित लेन-देन का आरोप

मामले का एक अन्य गंभीर पहलू R.O.M. के D.O. से जुड़ा बताया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि जयंत कुमार कुशवाहा, बाबू द्वारा उत्तर प्रदेश एवं कटनी के व्यापारियों से कथित रूप से राशि लेकर स्टीम दिए जाने की शिकायत सामने आई है।

यह आरोप गंभीर है और इसकी पुष्टि दस्तावेजों, D.O. रिकॉर्ड, संबंधित व्यापारियों के बयान तथा भुगतान संबंधी साक्ष्यों की जांच से ही हो सकती है।

इसी के साथ रात 10 बजे तक कांटा संचालित किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं की मांग है कि स्पष्ट किया जाए कि निर्धारित समय के बाद कांटा संचालन की अनुमति किस सक्षम अधिकारी के आदेश से दी गई और क्या इसके लिए कोई लिखित आदेश जारी हुआ था।

बताया गया है कि इस संबंध में शिकायत एसईसीएल के सीएमडी स्तर तक भेजी गई है।

रोड सेल इंचार्ज की भूमिका जांच के घेरे में

ट्रांसपोर्टरों के बीच यह भी चर्चा है कि कथित सुविधा शुल्क की राशि सीधे किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा न लेकर निजी व्यक्ति के माध्यम से वसूले जाने की व्यवस्था होने का आरोप है।

इस मामले में रोड सेल इंचार्ज  की भूमिका की भी जांच की मांग की जा रही है। हालांकि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का जवाब सामने आने के बाद ही स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

ऊपर तक पहुंचने वाले कथित ‘चढ़ावे’ की चर्चा

स्थानीय स्तर पर यह भी दावा किया जा रहा है कि कथित वसूली का हिस्सा केवल यार्ड तक सीमित नहीं है तथा कुछ लोगों द्वारा विजिलेंस और एसईसीएल मुख्यालय तक कथित ‘चढ़ावा’ पहुंचाए जाने की बातें कही जा रही हैं।

आखिर SECL के जिम्मेदार अधिकारियों को भनक क्यों नहीं?

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल एसईसीएल हसदेव क्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और निगरानी व्यवस्था को लेकर है।

यदि प्रति ट्रक हजारों रुपये की कथित वसूली लंबे समय से चल रही है, कोयले की गुणवत्ता को लेकर लगातार शिकायतें हैं, रात तक कांटा संचालित होने की व्यवस्था है और D.O. जारी करने को लेकर भी आरोप लगाए जा रहे हैं, तो फिर निगरानी तंत्र को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई?

और यदि जानकारी शिकायतों के माध्यम से पहले ही पहुंच चुकी थी, तो अब तक प्रभावी जांच और कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

बीबीसी लाईव में खबर प्रकाशित होने के बाद मामले को दबाने की कथित कोशिश?

पूर्व में बहेराबांध रोड सेल से संबंधित खबर प्रकाशित होने के बाद अब यह चर्चा भी सामने आ रही है कि मामले को शांत कराने के लिए कुछ लोगों को कथित रूप से मैनेज करने की कोशिश की जा रही है। कुछ छोटे स्तर के पत्रकारों को प्रबंधन द्वारा कथित रूप से प्रभावित किए जाने की बातें भी सामने आ रही हैं।

निष्पक्ष जांच ही बताएगी—आरोप कितने सच?

बहेराबांध रोड सेल यार्ड से जुड़े आरोपों की वास्तविकता सामने लाने के लिए कोयले की गुणवत्ता, स्टॉक की स्थिति, छंटाई की प्रक्रिया, वाहनवार लोडिंग रिकॉर्ड, कांटा रिकॉर्ड, D.O. जारी करने की प्रक्रिया, कथित सुविधा शुल्क, संबंधित कर्मचारियों की भूमिका और रात में कांटा संचालन की अनुमति की जांच आवश्यक है।

साथ ही संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों का पक्ष भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि आरोप और वास्तविकता के बीच का अंतर स्पष्ट हो सके।

अब सवाल सिर्फ बहेराबांध रोड सेल यार्ड का नहीं, बल्कि एसईसीएल की निगरानी व्यवस्था का भी है। यदि आरोप गलत हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति साफ होनी चाहिए और यदि आरोपों में सच्चाई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

निष्पक्ष जांच होगी तो ही सामने आएगा कि बहेराबांध रोड सेल यार्ड में चल रहा कथित ‘खेल’ महज अफवाह है या इसके पीछे वास्तव में लाखों रुपये के लेन-देन और कोयले की गुणवत्ता से जुड़ी गंभीर अनियमितताएं हैं।

अगला अपडेट जल्द…..

BBC LIVE
Author: BBC LIVE

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