अब्दुल सलाम क़ादरी-एडिटर इन चीफ(9424257566)
- राजनगर, बिजुरी, पौराधर, खोंगापानी, कुरजा और राजनगर ओपनकास्ट में कराए गए कार्यों की निष्पक्ष जांच की मांग तेज
अनूपपुर। एसईसीएल के हसदेव एरिया में सिविल विभाग द्वारा कराए जा रहे विकास एवं रखरखाव कार्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्र के राजनगर, बिजुरी, पौराधर, खोंगापानी, कुरजा तथा राजनगर ओपनकास्ट परियोजना में वर्षों से सड़क निर्माण, भवन मरम्मत, नाली निर्माण, कॉलोनी रखरखाव, जलापूर्ति एवं अन्य सिविल कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं।
स्थानीय लोगों और सूत्रों का आरोप है कि कई कार्यों में कागजों पर प्रगति दिखाई जाती है, जबकि धरातल पर गुणवत्ता और कार्य निष्पादन को लेकर गंभीर सवाल बने हुए हैं। यही कारण है कि अब यह मांग तेज हो गई है कि हसदेव एरिया में पिछले कई वर्षों के सभी प्रमुख सिविल कार्यों का स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय ऑडिट कराया जाए।
विजिलेंस की भूमिका पर उठ रहे सवाल
सबसे बड़ा सवाल विभागीय विजिलेंस की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहा है। आलोचकों का कहना है कि यदि प्रत्येक कार्य का नियमित भौतिक सत्यापन, गुणवत्ता परीक्षण और दस्तावेजों का गहन परीक्षण किया जाए, तो किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना काफी हद तक समाप्त हो सकती है।
लोग पूछ रहे हैं कि जिन कार्यों पर लाखों और करोड़ों रुपये खर्च किए गए, क्या उनका वास्तविक भौतिक सत्यापन हुआ? क्या गुणवत्ता की जांच की गई? यदि की गई तो उसकी रिपोर्ट क्या कहती है? और यदि नहीं की गई तो आखिर जिम्मेदार कौन है?
ठेकेदारी व्यवस्था पर उठ रहे प्रश्न
क्षेत्र में यह चर्चा भी आम है कि कुछ कार्यों में लागत और गुणवत्ता को लेकर गंभीर विसंगतियां देखने को मिलती हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार उठ रहे सवाल यह संकेत जरूर देते हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक हो चुकी है।
जानकारों का कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। ऐसे में यदि किसी कार्य में निर्धारित मानकों का पालन नहीं हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी केवल ठेकेदारों तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि कार्य स्वीकृत करने, मापन करने और भुगतान जारी करने वाली पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया की भी जांच होनी चाहिए।
ई एंड एम और एमएम विभाग भी चर्चा में
हसदेव एरिया में केवल सिविल विभाग ही नहीं, बल्कि ई एंड एम (इलेक्ट्रिकल एंड मैकेनिकल) तथा एमएम (मैटेरियल मैनेजमेंट) विभागों की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। सामग्री खरीदी, मशीनरी रखरखाव, मरम्मत कार्यों और भुगतान प्रक्रियाओं में पारदर्शिता को लेकर क्षेत्र में चर्चाएं लगातार बढ़ रही हैं।
क्या होगी उच्च स्तरीय जांच?
अब लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इन शिकायतों और आरोपों का संज्ञान एसईसीएल मुख्यालय, कोल इंडिया, केंद्रीय सतर्कता तंत्र अथवा अन्य सक्षम एजेंसियों द्वारा लिया जाएगा? क्या करोड़ों रुपये के कार्यों का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाएगा? या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?
– पिछले पांच वर्षों के सभी प्रमुख कार्यों का तकनीकी ऑडिट कराया जाए।
– भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच हो।
– कार्यों का थर्ड पार्टी भौतिक सत्यापन कराया जाए।
– गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
– यदि कहीं अनियमितता मिले तो जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों एवं संबंधित पक्षों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
अब जवाब किसके पास?
हसदेव एरिया में उठ रहे सवाल केवल कुछ निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग, प्रशासनिक जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़े हुए हैं। अब निगाहें एसईसीएल प्रबंधन, विजिलेंस विभाग और उच्च अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इन सवालों का जवाब कैसे देते हैं और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
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