अब्दुल सलाम क़ादरी-एडिटर इन चीफ
रायपुर। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की वर्तमान स्थिति को लेकर राजनीतिक गलियारों में लगातार चर्चा हो रही है। पार्टी के कई पुराने समर्थकों, कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों का मानना है कि संगठन और जनता के बीच बढ़ती दूरी कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी दल की मजबूती उसके जमीनी कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर निर्भर करती है। लेकिन आरोप लग रहे हैं कि कांग्रेस में ऐसे नेताओं की संख्या बढ़ी है जो चुनाव के दौरान आम जनता के बीच सक्रिय दिखाई देते हैं, जबकि चुनाव समाप्त होने के बाद आम नागरिकों और समर्थकों से दूरी बना लेते हैं। यही कारण है कि जनता का एक वर्ग स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहा है।
कई समर्थकों का यह भी कहना है कि सोशल मीडिया के दौर में जनता सीधे नेताओं तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास करती है, लेकिन अनेक बार उनके संदेशों और शिकायतों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती। इससे लोगों में यह धारणा बन रही है कि उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश करने वाले कई लोगों का कहना है कि पार्टी को जमीनी स्तर पर संवाद बढ़ाने की आवश्यकता है। उनका मानना है कि यदि कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और आम नागरिकों को सम्मानपूर्वक सुना जाए तथा उनकी समस्याओं पर प्रतिक्रिया दी जाए तो संगठन को मजबूती मिल सकती है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक दल की सफलता केवल भाषणों या बड़े आयोजनों से नहीं, बल्कि जनता के साथ निरंतर संवाद और विश्वास से तय होती है। यदि संगठन के भीतर ऐसे तत्व सक्रिय हैं जो व्यक्तिगत हितों या कथित दलाली की राजनीति को बढ़ावा देते हैं, तो इससे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंच सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस को समय रहते संगठनात्मक समीक्षा करते हुए जमीनी कार्यकर्ताओं को महत्व देना होगा। जनता, समर्थकों और मीडिया के साथ बेहतर संवाद स्थापित करना आज की राजनीतिक आवश्यकता बन चुका है। अन्यथा राजनीतिक जमीन लगातार कमजोर होने का खतरा बना रह सकता है।
सौजन्य खबर 30 दिन






















