अब्दुल सलाम कादरी। रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति को लेकर पिछले दो वर्षों में किए गए एक व्यापक सर्वे और जमीनी अध्ययन में कांग्रेस पार्टी के लिए कई महत्वपूर्ण संकेत सामने आए हैं। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार यदि कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में तथा अधिकांश पूर्व विधायकों को दोबारा टिकट देकर मैदान में उतारती है, तो पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि यदि कांग्रेस नए, युवा और स्थानीय स्तर पर सक्रिय चेहरों को मौका देती है तो उसके पास दोबारा सत्ता में वापसी का मजबूत अवसर मौजूद है।
सर्वे से जुड़े सूत्रों के मुताबिक यह अध्ययन लगभग दो वर्षों तक प्रदेश के विभिन्न जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में किया गया। इस दौरान मतदाताओं, पार्टी कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों, व्यापारियों, किसानों, युवाओं और महिला समूहों से बातचीत कर उनकी राय ली गई। रिपोर्ट में सामने आया कि कांग्रेस के कई पूर्व विधायक अपने क्षेत्रों में जनता से लगातार संपर्क बनाए रखने में असफल रहे हैं, जिसके कारण उनके प्रति नाराजगी बढ़ी है।
पूर्व विधायकों के खिलाफ दिखी नाराजगी
रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस के कई पूर्व विधायकों को लेकर जनता के बीच यह धारणा बनी है कि चुनाव जीतने के बाद उन्होंने क्षेत्रीय समस्याओं की ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया। सड़क, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर लोगों ने असंतोष व्यक्त किया है। कई स्थानों पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने भी बंद कमरे की बैठकों में यह स्वीकार किया कि पुराने चेहरों को दोबारा टिकट देने से पार्टी को नुकसान हो सकता है।
सर्वे में यह बात भी सामने आई कि कई विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के पुराने नेताओं के खिलाफ सत्ता विरोधी माहौल अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। ऐसे क्षेत्रों में मतदाता नए विकल्पों की तलाश में दिखाई दे रहे हैं।
भूपेश बघेल की लोकप्रियता पर मिले मिले-जुले संकेत
रिपोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की राजनीतिक पकड़ और जनाधार को स्वीकार किया गया है, लेकिन साथ ही यह भी कहा गया है कि केवल उनके चेहरे के भरोसे चुनाव जीतना कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगा। सर्वे में शामिल कई मतदाताओं ने माना कि भूपेश बघेल सरकार की कुछ योजनाओं को आज भी लोग याद करते हैं, लेकिन दूसरी ओर कई मतदाताओं का मानना है कि पार्टी को अब नेतृत्व के साथ-साथ संगठन और उम्मीदवारों में भी बदलाव की जरूरत है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि कांग्रेस केवल पुराने नेतृत्व और पुराने उम्मीदवारों के सहारे चुनावी रणनीति बनाती है तो उसे अपेक्षित सफलता मिलना मुश्किल हो सकता है।
युवाओं और नए चेहरों की मांग
सर्वे का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह बताया गया है कि बड़ी संख्या में मतदाता राजनीति में नए चेहरों को देखना चाहते हैं। विशेष रूप से युवा मतदाताओं ने ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने की बात कही जो लगातार जनता के बीच सक्रिय रहे हों और जिनकी छवि साफ-सुथरी हो।
रिपोर्ट के अनुसार कई विधानसभा क्षेत्रों में ऐसे स्थानीय नेता मौजूद हैं जिन्होंने बिना किसी बड़े पद के जनता के बीच मजबूत पकड़ बनाई है। यदि कांग्रेस ऐसे लोगों को टिकट देती है तो पार्टी को सीधा लाभ मिल सकता है।
संगठनात्मक बदलाव की भी जरूरत
सर्वे में यह भी कहा गया है कि केवल उम्मीदवार बदलने से ही स्थिति नहीं सुधरेगी। कांग्रेस को संगठन के भीतर भी बड़े बदलाव करने होंगे। बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को मजबूत करना, गुटबाजी समाप्त करना और जमीनी कार्यकर्ताओं को सम्मान देना पार्टी की प्राथमिकता होनी चाहिए।
कई जिलों में कार्यकर्ताओं ने शिकायत की कि चुनाव के समय उनकी भूमिका बढ़ जाती है, लेकिन बाकी समय उनकी अनदेखी की जाती है। रिपोर्ट के अनुसार यह स्थिति कांग्रेस के लिए भविष्य में नुकसानदायक साबित हो सकती है।
सत्ता वापसी का रास्ता अभी भी खुला
सर्वे रिपोर्ट का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि कांग्रेस के लिए सत्ता में वापसी की संभावनाएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक यदि पार्टी समय रहते उम्मीदवार चयन में बदलाव करती है, नए चेहरों को अवसर देती है और जनता के मुद्दों को केंद्र में रखकर चुनाव लड़ती है तो वह मजबूत मुकाबला कर सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनाव कांग्रेस के लिए उम्मीदवारों और रणनीति का चुनाव होगा। यदि पार्टी जनता के संकेतों को समझकर फैसले लेती है तो सत्ता में वापसी की संभावना बन सकती है, लेकिन यदि पुराने समीकरणों पर ही भरोसा किया गया तो परिणाम उम्मीद के विपरीत भी जा सकते हैं।
(यह खबर एक सर्वे रिपोर्ट और राजनीतिक विश्लेषण पर आधारित है। चुनावी परिणाम अंततः मतदाताओं के निर्णय पर निर्भर करेंगे।)






















