June 24, 2026 12:07 am

हसदेव एरिया में रिपेयरिंग कार्यों के करोड़ों के टेंडरों पर सवाल, सिविल विभाग की कार्यप्रणाली चर्चा में

अब्दुल सलाम क़ादरी-चीफ एडीटर

हसदेव एरिया में करोड़ों रुपये के रिपेयरिंग कार्यों से जुड़े टेंडरों को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। लगभग 1.83 करोड़ रुपये के जेकेडी रिपेयर कार्य और 1.50 करोड़ रुपये के बिजुरी रिपेयर कार्य की निविदा प्रक्रिया अब चर्चा का विषय बन गई है। ठेकेदारों और स्थानीय सूत्रों के बीच यह सवाल गूंज रहा है कि आखिर इन टेंडरों में ऐसी क्या परिस्थितियां बनीं, जिससे पूरी प्रक्रिया को लेकर संदेह और असंतोष की स्थिति पैदा हो गई।

Secl विजिलेंस को इस टेंडर के बदले कार्यवाही नही करने के लिए दिया गया कमीशन?

सूत्रों का दावा है कि निविदा प्रक्रिया में कई ठेकेदारों ने भाग लिया था और कुछ ने प्रतिस्पर्धी दरों पर बोली भी प्रस्तुत की थी। इसके बावजूद अंतिम आवंटन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। चर्चा यह भी है कि कुछ प्रतिभागियों को अपेक्षित अवसर नहीं मिला और निर्णय प्रक्रिया को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं दिखाई गई। आखिर एबव यानी निविदा दर से ज्यादा देकर कम्पनी को लाखों रुपयों का नुकसान करवाया गया और खुद की जेब भरी गई।

मामले में सिविल विभाग के इंजीनियर विश्वकर्मा की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन संबंधित पक्षों का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि करोड़ों रुपये के रिपेयरिंग कार्यों में नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किस स्तर तक किया गया, इसकी जांच आवश्यक है।

आखिर उठ रहे हैं ये बड़े सवाल

– 1.83 करोड़ और 1.50 करोड़ रुपये के दोनों रिपेयरिंग कार्यों का आवंटन किन मानकों पर किया गया?
– निविदा में भाग लेने वाली सभी पार्टियों का मूल्यांकन किस प्रक्रिया के तहत किया गया?
– प्रतिस्पर्धी दरों पर बोली लगाने वाले अन्य ठेकेदारों को अवसर क्यों नहीं मिला?
– क्या पूरी निविदा प्रक्रिया का रिकॉर्ड और मूल्यांकन रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी?
– क्या संबंधित अधिकारी और प्रबंधन पूरे मामले पर विस्तृत स्पष्टीकरण देंगे?
– यदि प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप थी, तो फिर इतने सवाल क्यों उठ रहे हैं?

पारदर्शिता और जांच की मांग

मामले को लेकर अब निष्पक्ष जांच की मांग तेज होती जा रही है। स्थानीय लोगों और ठेकेदारों का कहना है कि करोड़ों रुपये के कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता होना आवश्यक है। यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है तो विभाग को संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। इससे उठ रहे संदेह और चर्चाओं पर विराम लग सकेगा।

जीएम और सिविल विभाग और सीएमडी बिलासपुर के जवाब का इंतजार

फिलहाल संबंधित अधिकारियों का विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया है। विभागीय जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या विभाग इन सवालों का जवाब देगा और क्या पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाएगी।

सीबीआई और विजिलेंस से जांच की मांग

मामले को लेकर असंतुष्ट पक्ष अब उच्च स्तर पर शिकायत की तैयारी में जुटे हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, कथित अनियमितताओं और टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सीबीआई एवं विजिलेंस विभाग को शिकायत भेजने की तैयारी की जा रही है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि यदि स्वतंत्र एजेंसी द्वारा पूरे मामले की जांच कराई जाए तो निविदा प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि शिकायत आधिकारिक रूप से दर्ज हुई है या नहीं। संबंधित पक्षों का कहना है कि शिकायत के साथ आवश्यक दस्तावेज और निविदा से जुड़े रिकॉर्ड भी संलग्न किए जाएंगे।

अब देखने वाली बात होगी कि संबंधित विभाग इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या मामले की जांच के लिए कोई उच्च स्तरीय कार्रवाई की जाती है।

BBC LIVE
Author: BBC LIVE

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